UP News : यूपी में सरकार संपत्ति से जुड़े कई मामलों को देखते हुए लोगों की राहत के लिए कई राहतभरे फैसले लेती है। अब हाल ही में पैतृक संपत्ति के बंटवारे से जुड़े मामलों को देखते हुए योगी सरकार ने बड़ा फैसला सुनाया है। योगी सरकार के इस फैसले के तहत संपत्ति के बंटवारे (Division of property) पर कितना खर्च आएगा, इस बारे में बताया गया है।
योगी सरकार ने पैतृक संपत्ति के बंटवारे पर खर्च को लेकर हाल ही में एक बड़ा फैसला सुनाया है। योगी सरकार के इस फैसले से संपत्ति विवाद कम होने के साथ ही लोगों को राहत मिलेगी। योगी सरकार के इस फैसले के तहत पैतृक संपत्ति (ancestral property) के बंटवारे पर आने वाले खर्च को कम किया गया है और इसके लिए सरकार जल्द ही शासनादेश जारी करेगी। आइए विस्तार से जानते हैं इस बारे में।
निबंधन शुल्क का भी करना होता है भुगतान
संयुक्त पारिवारिक संपत्ति, जिसे पैतृक संपत्ति (ancestral property kya hai) कहते हैं, उसके विभाजन पर अब अधिकतम 10 हजार रुपये ही खर्च हो सकते हैं। जब विभाजन होगा, उसकी पक्की लिखा-पढ़ी के लिए पांच हजार रुपये बतौर स्टांप ड्यूटी का शुल्क (Stamp duty charges) देना होगा और पांच हजार रुपये निबंधन शुल्क का भुगतान करना होगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में बीते मंगलवार को जो कैबिनेट की बैठक हुई है, उसमें स्टांप एवं निबंधन विभाग के स्टांप ड्यूटी व निबंधन शुल्क में छूट (Exemption from registration fee) देने से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है और जल्द ही शासनादेश जारी होंगे। जैसे ही शासनादेश जारी होते हैं, तो इससे छूट की सुविधा का लाभ उठाया जा सकेगा। पारिवारिक संबंधियों के बीच जो विभाजन होता है, उसके विलेख पर अभी स्टांप ड्यूटी संपत्ति के मूल्य पर बांड विलेख के जैसे ही चार प्रतिशत लगती है और साथ ही निबंधन शुल्क भी एक प्रतिशत देना पड़ता है।
सपत्ति के बंटवारे की होगी पक्की लिखा-पढ़ी
सरकार का कहना है कि इस तरह से बढ़ते खर्च को देखते हुए कई मामले देखे जा रहे हैं और इन ज्यादातर मामलों में विभाजन डीड न कराए जाने पर संपत्ति को लेकर न्यायालय में विवाद में खूब इजाफा हो रहा हैं। जिसको देखते हुए योगी कैबिनेट ने चार पीढ़ियों तक किसी भी मूल्य की संपत्ति के बंटवारे (division of property of value) के लिए एक समान पांच हजार रुपये स्टांप ड्यूटी शुल्क (stamp duty fee) तय किया है और साथ ही पांच हजार रुपये ही निबंधन शुल्क तय किया है।
जैसे ही इस मामले के लिए कैबिनेट की बैठक हुई तो बैठक के बाद स्टांप एवं पंजीयन राज्य मंत्री रवीन्द्र जायसवाल का कहना है किद जल्द ही इससे जुड़े शासनादेश जारी कर दिया जाएगा। जैसे ही शासनादेश होते है तो 10 हजार रुपये की लागत पर सपत्ति के बंटवारे (Sampatti Ka Batwara ) की पक्की लिखा-पढ़ी कराई जा सकेगी।
विभाजित संपत्ति का कैसे होगा बंटवारा
जायसवाल का कहना है कि स्टांप व निबंधन शुल्क (stamp and registration fee) में बंपर छूट देने से विभाजन विलेख के पंजीकरण को बढ़ावा मिलेगा और ऐसे में पारिवारिक विवाद कम हो सकेंगे, जिससे दीवानी व राजस्व न्यायालयों में मुकदमें कम होंगे। नोट करने वाली बात यह है कि विभाजन विलेख में सभी पक्षकार विभाजित संपत्ति में संयुक्त हिस्सेदार के तौर पर शामिल होते हैं। संपत्ति का बंटवारा उनके बीच ही होता है। विभाजन विलेख में स्टांप व निबंधन शुल्क की छूट एक ही मृतक व्यक्ति की संपत्ति का उसके सभी सह स्वामी के बीच बंटवारे पर मिलेगी।
छूट से इतना घटेगा राजस्व
सरकार का अनुमान है कि तमिलनाडु, कर्नाटक, राजस्थान व मध्य प्रदेश आदि कई राज्यों के जैसे ही प्रदेशवासियों को पैतृक संपत्ति के बंटवारे पर स्टांप ड्यूटी (Stamp duty on partition of ancestral property) व निबंधन में लगने वाले शुल्क में छूट देने से 6.39 करोड़ रुपये राजस्व का नुकसान हो सकता है, जिसमे से 5.59 करोड़ रुपये स्टांप ड्यूटी के घट सकते हैं और 80.68 लाख रुपये निबंधन शुल्क से घटने के आसार है। हालांकि, विभागीय के मुताबिक छूट देने से विभाजन विलेख के रजिस्ट्रीकरण (Registration of Partition Deed) को बंपर प्रोत्साहन मिलेगा।
संपत्ति विवाद के झंझट से मिलेगा छुटकारा
आपको बता दें कि संयुक्त या अविभाजित संपत्ति (undivided property) के सहस्वामियों को जो संपत्ति विभाजित की गई है, उसका स्वामित्व मिलेगा। इस वजह से उनके द्वारा विभाजित संपत्ति के अपने हिस्से को सेल करने को लेकर आदि पर सरकार का स्टांप राजस्व बढ़ सकता है। विभागीय के मुताबिक प्रदेश में जितनी बड़ी संख्या में पारिवारिक संपत्ति (household wealth) की बातचीज जो सामने आती हैं उनके सापेक्ष पंजीकृत विभाजन विलेखों की संख्या भी बहुत कम है। राजस्व हानि से सबसे बड़ी बात यह है कि सरकार के इस फैसले से प्रदेशवासियों को संपत्ति विवाद के झंझट से छुटकारा मिलेगा।
