जैसे-जैसे आयकर रिटर्न दाखिल करने की आखिरी तारीख नजदीक आ रही है, करदाताओं और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स पर दबाव बढ़ता जा रहा है। आयकर रिटर्न दाखिल करने की आखिरी तारीख 15 सितंबर है, लेकिन आयकर पोर्टल में तकनीकी दिक्कतों के कारण समय पर रिटर्न दाखिल करने में दिक्कत आ रही है।
ग्वालियर क्षेत्र में अभी तक 50% से भी कम करदाताओं ने अपना रिटर्न दाखिल किया है। जैसे-जैसे आखिरी तारीख नजदीक आ रही है, इससे और भी समस्याएँ पैदा हो सकती हैं। करदाताओं को पोर्टल की धीमी गति, लॉगिन में समस्या और डेटा अपलोड करते समय त्रुटियों जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि आखिरी दिनों में ये समस्याएँ और बढ़ सकती हैं क्योंकि ज़्यादातर लोग आखिरी समय में रिटर्न दाखिल करते हैं।
ओटीपी प्राप्त करने में देरी
ई-सत्यापन के लिए, करदाताओं को आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर ओटीपी की आवश्यकता होती है। लेकिन कई करदाताओं को ओटीपी प्राप्त होने में देरी का सामना करना पड़ रहा है। इस वजह से, रिटर्न पूरा नहीं हो पाता और प्रोसेसिंग लंबित हो जाती है।
देरी के कारण नुकसान
जुर्माना: देरी से रिटर्न दाखिल करने पर ₹1,000 से ₹5,000 तक का जुर्माना लग सकता है। देरी से रिटर्न दाखिल करने पर रिफंड भी नहीं मिलता है।
अतिरिक्त ब्याज: करदाताओं को देरी से रिटर्न दाखिल करने पर ब्याज देना पड़ता है, तथा रिफंड प्रक्रिया में भी अधिक समय लगता है।
सीए ने क्या कहा
चार्टर्ड अकाउंटेंट पंकज शर्मा ने कहा, “रिटर्न फाइलिंग और ऑडिट दोनों ही महत्वपूर्ण हैं, लेकिन दोनों को निर्धारित तिथियों में ठीक से पूरा करना एक बड़ी चुनौती है। सरकार को समय सीमा तय करने से पहले वास्तविक कार्यभार और पोर्टल की क्षमता पर विचार करना चाहिए।”
