UP News – यूपी में प्रोपर्टी रजिस्ट्री के नियमों में बदलाव किया गया है. दरअसल आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रॉपर्टी बंटवारे पर स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस की अधिकतम सीमा इतने रुपये तय की, जिससे आम लोगों को बड़ी राहत मिलेगी… इस अपडेट से जुड़ी पूरी डिटेल जानने के लिए इस खबर को पूरा पढ़ लें-
उत्तर प्रदेश सरकार ने पारिवारिक प्रॉपर्टी के बंटवारे को आसान बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है. अब प्रॉपर्टी बंटवारे (Partition Deed) पर अधिकतम 5,000 रुपये की स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस लगेगी. पहले प्रॉपर्टी की कुल कीमत (total price of property) के हिसाब से टैक्स (tax) देना पड़ता था, जो काफी महंगा था. इस वजह से लोग अक्सर रजिस्ट्री कराने से बचते थे, जिससे पारिवारिक विवाद बढ़ते थे.
नई व्यवस्था से लोगों को बड़ी राहत मिलेगी और कोर्ट-कचहरी के चक्कर कम होंगे. यह निर्णय आम जनता के लिए बड़ी राहत लेकर आया है.
अब नए नियम के तहत, चाहे आपकी संपत्ति की कीमत कितनी भी बड़ी क्यों न हो, बंटवारे पर अधिकतम 5,000 रुपये ही शुल्क लगेगा. इसका सबसे बड़ा फायदा आम आदमी को होगा क्योंकि अब रजिस्ट्री कराना आसान और सस्ता हो जाएगा.
इसे एक उदाहरण से समझते हैं- अगर किसी परिवार की प्रॉपर्टी की कीमत 20 लाख रुपये है, तो पहले उन्हें 4% (80,000 रुपये) स्टाम्प ड्यूटी और 1% (20,000 रुपये) रजिस्ट्रेशन फीस (regiestration fees) यानी कुल 1 लाख रुपये देने पड़ते थे. लेकिन अब उन्हें केवल 5,000 रुपये चुकाने होंगे. वहीं अगर प्रॉपर्टी की कीमत 1 करोड़ रुपये है, तो पहले लगभग 5,00,000 रुपये खर्च होते थे, जबकि अब केवल 5,000 रुपये लगेंगे.
इस बदलाव से परिवारों को प्रॉपर्टी बंटवारे (property division) के दौरान लंबे-चौड़े खर्च और झगड़ों से छुटकारा मिलेगा. जमीन और मकानों का रिकॉर्ड भी अपडेट रहेगा, जिससे आगे चलकर खरीद-बिक्री में पारदर्शिता और सुविधा बनी रहेगी.
सरकार को शुरुआत में राजस्व में थोड़ी कमी आ सकती है, लेकिन आगे चलकर ज्यादा लोग रजिस्ट्री कराएंगे और इस तरह आय बढ़ेगी. दूसरे राज्यों जैसे तमिलनाडु, कर्नाटक, राजस्थान और मध्य प्रदेश में यह नियम पहले से लागू है और वहां सकारात्मक नतीजे देखने को मिले हैं.
क्या होती है स्टाम्प ड्यूटी-
स्टाम्प ड्यूटी (stamp duty) सरकार द्वारा लिया जाने वाला एक टैक्स है जो किसी प्रॉपर्टी या एग्रीमेंट को कानूनी मान्यता देता है. यह टैक्स जमीन, मकान या किसी भी संपत्ति की खरीद-बिक्री, ट्रांसफर (tranfer), या बंटवारे के दस्तावेज़ों की रजिस्ट्री के समय चुकाया जाता है. यह प्रॉपर्टी की कुल कीमत का एक निश्चित प्रतिशत होता है. स्टाम्प ड्यूटी राज्य सरकार के राजस्व को बढ़ाने के साथ-साथ लेन-देन को कानूनी रूप से सुरक्षित भी बनाती है.
