आलू के स्टार्च से बनाई जाएगी बायो प्लास्टिक ,प्रोजेक्ट को मिली सहायता

 
potato

गुजरात सरकार आलू से प्लास्टिक निकलवाने की तैयारी कर रही है पाटन की हेमचंद्राचार्य नार्थ गुजरात यूनिवर्सिटी के लाइफ विभाग के प्रोफेसर ने प्रकृति के हिट में 3 साल का यह प्रोजेक्ट बनाया है प्रोफेसर डॉ आशीष पटेल द्वारा किए गए एक अध्धयन में यह बात खुलकर सामने आई है की आलू के स्टार्च से बायो प्लास्टिक का निर्माण हो सकता है जिसके उपयोग का सकारात्मक प्रभाव रहने वाले जीव -जन्तुओ को होगा जो पस्टिक के कारण मौत के मुहं में आ रहे है अध्धयन में यह भी पाया गया है की एकल -उपयोग प्लास्टिक की जगह बायोप्लास्टिक के उपयोग से नेचर को फायदा होगा लेकिन बायो -प्लास्टिक उपयोग के कुछ दिनों में स्वयं ही नष्ट हो जाएगा 

potato
आलू के स्टार्च से बायो प्लास्टिक बनेगा गुजरात के पाटण स्थित हेमचंद्राचार्य नार्थ गुजरात यूनिवर्सिटी के लाइफ साइंस विभाग के परिसर में इस प्रोजेक्ट बनाने जुट गए है अगले 10 दिन में बायो प्लास्टिक बन सकता है उन्होंने कहा की बायो प्लास्टिक के कई फायदे होंगे यह मौजूदा प्लास्टिक से ज्यादा सही होगा और यह प्रकृति से जल्द ही नष्ट हो जाएगा 
बायो प्लास्टिक मक्का ,गेंहू के पौधों या पेट्रोलियम की बजाय अन्य जैविक सामग्रियों से बने प्लास्टिक को संदर्भित करता है बायो प्लास्टिक बायोडिग्रेडेबल और कंपोस्टेबल प्लास्टिक सामग्री है इसे मक्का और गणना के पौधों से सुगर निकलकर तथा उसे PLA में बदल कर प्राप्त किया जाता है इसे सूक्ष्म जीवो के PHA से भी बनाया जाता है 
बायो प्लास्टिक या पौधे पर आधारित प्लास्टिक को पेट्रोलियम आधारित पलकास्टिक के ऑप्शन स्वरूप जलवायु रूप में प्रचारित किया जाता है प्लास्टिक आमतौर पर पेट्रोलियम से बने होते है जीवष्य िरधन की कमी और जलवायु जैसी परेशानियों पर उनका प्रभाव पड़ता है 

potato
बड़ी मात्रा में बायो प्लास्टिक का उत्पादन विश्व स्तर पर भूमि उपयोग को बदल सकता है इससे वन क्षेत्रों की भूमि कृषि योग्य भूमि में बदल सकती है वन मक्के या गन्ने के मुकाबले अधिक co2 अवशोषित करते है 
बायो प्लास्टिक तोड़ने हेतु इसे उच्च तापमान तक गर्म करके की आवश्यकता होती है तीव्र ऊष्मा के बिना बायो प्लास्टिक से लैंडफिल या कंपोस्ट का क्षरण संभव होगा अगर समुद्री वातावरण में निस्सारित करते है तो यह पेट्रोलियम आधारित प्लास्टिक के समान ही नुकसान पहुंचता है