नीली क्रांति : बायोफ्लॉक टेक्नीक का इस्तेमाल कर मछली पालन करने से होगी शानदार कमाई

 
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भारत में खेती के बाद मछली पालन व्यवसाय में तेजी आई है जहां पहले पोखरों और तालाबों में मछली पालन किया जाता है लेकिन आज के समय में किसान टैंकों में भी मछली पालन कर मछली पालक किसान अपनी आय को बढ़ा रहे है इंडिया में नीली क्रांति के तहत आज मछली पालन की नई नई टेक्निक का चलन बढ़ा है इसी तरह की एक नई तकनीक बायोफ्लॉक टेक्नीक है 

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बायोफ्लॉक टेक्नीक में एक विशेष प्रकार के बैक्टीरिया का इस्तेमाल किया जाता है इस बैक्टीरिया का नाम ही बायोफ्लॉक है इस टेक्नीक के अंतर्गत करीब 10 से 15 हजार लीटर के बड़े -बड़े टैंकों में मछलियों को डाला जाता है इन टैंकों में पानी डालने पानी निकलने के साथ ही ऑक्सीजन की उचित व्यवस्था होती है मछलियां जितना खाती है उसका लगभग 75 % मल के रूप में बाहर निकल देती है यह मल पानी में फ़ैल जाता है बायोफ्लॉक बैक्टीरिया इस मल को प्रोटीन में बदल देता है जिसे मछलियां खा जाती है इससे एक तिहाई फीड की बचत होती है इसके अलावा पानी भी साफ रहता है 
इस टेक्नीक के इस्तेमाल से मछली पालन करने में कम लागत पर अधिक मछलियों का अधिक और बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है इससे मछलियों के खाने के खर्च कम आता है और पानी साफ करने के खर्च में भी कम होता है 

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इस टेक्नीक में टैंकों में मछली पालन होने से टैंकों के पानी को बदलना आसान होता है इसके लिए तालाब में मछलियों को निकलना काफी मुश्किल भरा काम होता है जबकि टैंक से मछलियों को निकलना आसान होता है इसके लिए पहले टैंक से पानी बाहर निकलने और बाद में मछलियां को बाहर निकल लें अगर मछलियों में कोई रोग हो जाता है तो टैंक में परेशानी होती है बस उसे इलाज करने की जरूरत होती है जबकि तालाब में पुरे तालाब में दवा डालनी पड़ती है 
अगर हम 7 टैंक मछली पालन शुरू करें तो इसके शुरुआत में करीब  7.5 लाख  रूपये का खर्च आता है इसमें मछलियों के बीज से लेकर उनके फीड और कई प्रकार की टेस्टिंग किट की लागत भी जोड़ी गई है यह खर्चा 15 -15 हजार लीटर के टैंक में मछली पालन करने पर आता है अगर मछली पालक 2 बार मछली पालन करके बेचता है तो उनको 8 लाख रूपये का फायदा हो सकता है