कम लागत पर करें स्ट्रॉबेरी की खेती ,होगी बंपर कमाई ,जानिए तरीका

 
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किसान पारंपरिक फसलों की खेती के साथ ही बागवानी फसलों की खेती की रुख कर रहे है जिससे अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है इन फसलों की सबसे बड़ी खासियत यह है की इनका बाजार में अच्छा मूल्य मिल जाता है अगर एक बार सही तरिके से इसकी खेती पर ध्यान दिया जाए तो कई सालों तक लाभ कमाया जा सकता है स्ट्राबैरी की खेती किसानों के लिए काफी लाभकारी साबित हो सकती है आज हम आपको स्ट्राबैरी की आधुनिक तकनीक से की जाने वाले खेती के बारे में बताएंगे 

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स्ट्रॉबेरी फ्ऱागार्या जाति का एक पेड़ होता है इस फल की खेती पुरे वर्ल्ड में की जाती है इसके फल को भी इसी नाम से जाना जाता है यह चटक लाल रंग का होता है इसे ताजा फल के रूप में खाया जाता है स्ट्रॉबेरी में कई आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते है जो हमारे स्वास्थ्य के लिए जरुरी होते है 
स्ट्रॉबेरी एंटीऑक्सीडेंट्स विटामिन सी विटामिन -बी 1 बी 2 नियासिन प्रोटीन और खनिजों का एक अच्छा प्राकृतिक स्त्रोत है इसमें मिनरल्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते है स्ट्रॉबेरी में विटामिन सी एंटीऑक्सीडेंट फोलेटमैग्नीशियम और पोटैशियम जैसे पोषक तत्व भरपूर रूप से होते है जो बॉडी को कई परेशानियों से दूर करने में लाभकारी होते है यह वजन कम करने से लेकर कैंसर जैसी बीमारियों के बचाव के लिए लाभकारी है लेकिन अगर इनका अधिक इस्तेमाल किया जाता है तो यह हानिकारक होती है 
स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए सरकार की तरफ से किसानों को सब्सिडी या अनुदान दिया जाता है यह अनुदान अलग -अलग राज्यों में वहां के नियमानुसार दिया जाता है कृषि विभाग की तरफ से दिए जाने वाले अनुसाद के तहत इसके लिए प्लास्टिक मल्चिंग और ड्रिप इरीगेशन गव्वारा सिंचाई आदि यंत्र पर 40 से 50 % तक सब्सिडी का लाभ किसानो को दिया जाता है 
यह फसल शीतोष्ण जलवायु वाली फसल है जिसके लिए 20 से 30 डिग्री तापमान सही रहता है तापमान बढ़ने पर फसल को नुकसान होता है और उपज प्रभावित हो जाती है रेतीली दोमट भूमि जिसमें जल निकासी की अच्छी व्यवस्था हो इसके लिए सबसे अच्छी रहती है मिटटी का PH मान 5 से 6 .5 तक होना चाहिए 

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स्ट्रॉबेरी के पौधों की रोपाई 10 सितंबर से 10 अक्टूबर तक की जा सकती है रोपाई के समय अधिक तापमान होने पर पौधों को कुछ समय बाद यानि 20 सितंबर तक रोपाई का काम शुरू किया जा सकता है 
स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए सबसे पहले बेड तैयार करें इसके लिए खेत में आवश्य खाद उर्वरक देने के बाद बेड बनाने के लिए बेड की चौड़ाई 2 .5 -3 फ़ीट रखनी चाहिए बेड तैयार हो जाने के बाद उस पर टपक सिंचाई की पाइप लाइन बिछा दें पौधे लगाने के लिए प्लास्टिक मंचिंग में 20 से 30 सेमि की दुरी पर छेद करें 
स्ट्रॉबेरी का पौधा बहुत नाजुक होता है इसलिए इसे समय -समय पर खाद और उर्वरक दोनों देना जरुरी है साधारण रेतीली भूमि में 10 से 15 टन सड़ी गोबर की खाद प्रति एकड़ की दर से भूमि तैयारी के समय बिखेर कर मिटटी में मिला दी जाती है 
जब फसल का रंग 70 % पक हो जाए तो इसे तोड़ लेना चाहिए अगर मार्केट दुरी पर है तो तोडा सख्त स्वस्थ में ही तोड़ लेना चाहिए इसकी तुड़ाई अलग -अलग दिनों में करना छाया तुड़ाई के समय स्ट्रॉबेरी के फल को नहीं पकड़ें ऊपर से डंडी पकड़ें जिससे फल को नुकसान नहीं पहुंचेगा और फल की तुड़ाई का काम भी आसान हो जाएगा और इसके पीकिन भी बहुत आसान तरिके से करनी चाहिए 
स्ट्रॉबेरी को खेत में लगाए जाने के लगभग डेढ़ महीने बाद फल लगना शुरू हो जाते है इसलिए अगले 4 महीने तक बंपर फसलों का उत्पादन किया जा सकता है अगर एक एकड़ में 22 हजार स्ट्रॉबेरी के पौधे लगाए जाएं तो प्रतिदिन 5 से 6 किलोग्राम फल प्राप्त किए जा सकते है एक एक में स्ट्रॉबेरी की फसल में करीब 2 से 3 लाख की लागत आती है और पैदावार होने पर खर्च निकालकर 5 से 6 लाख का फायदा मिलता है