एक बार करे इस लाल फूल की खेती, 20 साल तक नही करना होगा कोई काम

 
PIC

 पलाश के फूल को होली के रंगों को बनाने के लिए खास मुख्य रूप से इस्तेमाल किया जाता है साथ ही यह फूल अपनी खूबसूरती के लिए भी जाना जाता है पिछले कुछ वर्षों से इसकी खेती में कमी आई है लेकिन फिर भी किसान इसकी खेती से अच्छी खासी आय कमा रहे है आज हम आपको पलाश की खेती से जुडी कुछ खास बातें बताएंगे 

PIC
पलाश के फूल को अलग -अलग जगहों पर अलग अलग नाम से जाना पहचाना जाता है इसे परसा टेसू किश्क सुपका और फ्लेम ऑफ फोरेस्ट जैसे नामों से जाना जाता है पलाश UP का राजकीय फूल भी है इस फूल के हर हिस्से से बढ़िया लाभ प्राप्त किया जा सकता है 
इस फूल की खेती सबसे ज्यादा झारखंड साउथ इंडिया पंजाब हरियाणा UP और MP में होती है इसके पत्ते छाल जड़ और लकड़ी का इस्तेमाल कई तरह के जैविक उत्पाद बनाने के लिए किया जाता है मार्किट में इसका चूर्ण और तेल भी अच्छी कीमत पर बिकता है यह पेड़ एक बार लगाने के बाद 40 साल तक जीवित रहता है 

PIC
अगर नाक कान मल मूत्र या अन्य किसी जगह से रक्त स्त्राव हो तो पलाश की छाल का 50 मिली काढ़ा बनाएं और इसे ठंडा करके मिश्री में मिलाकर पीने से काफी फायदा होता है पलाश के गोंद को 1 से 3 ग्राम मिश्री में मिलाकर दूध या आंवला के रस के साथ लें इससे हड्डियां मजबूत होंगी साथ ही गोंद को गर्म पानी के साथ घोलकर पिने से दस्तों में भी फायदा मिलता है 
अगर किसान चाहें तो छोटे स्तर पर पलाश के पेड़ लगाकर भी 30 साल से अधिक समय तक लाभ कमा सकते है साथ में सब्जियों की अंतवर्तीय खेती करके अतिरिक्त लाभ प्राप्त किया जा सकता है एक एकड़ खेत में पलाश के 3200 पौधे लगा सकते है जो 3 से 4 साल में फूल देने के काबिल हो जाते है