मोती की खेती कर करें बंपर कमाई ,नरेंद्र कुमार कर रहे है मोती की खेती जानिए मोती की खेती करने का तरीका

 
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मोती शुद्धता और पूर्णता क प्रतीक होते है सफेद मोती लालित्य सुंदरता और शांति का प्रतीक है वे चन्द्रमा के रूप में पहचाने जाते है और हीरे के लिए मूलयवान है मोती मुख्य रूप से अर्गोनॉइट और कोंचियोलिन से बने होते है मोती अलग -अलग आकृतियों और आकारों में होते है 

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भारत पहले भी मोती की खेती कर रहा था इंडियन सकरकर के केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान ने मोती  की खेती करने में सफलता प्राप्त की और एक परियोजना तिरुवंतपुरम के पास विझिनजाम केंद्र  में शुरू की मोती उत्पादन के लिए गुजरात में प्रयास किए गए 
आज हम आपको राजस्थान में मोती की खेती करने वाले एक ऐसे किसान की कहानी बताएंगे इनसे मोती की खेती के गुरु सीखकर आप भी खेती कर सकते है और बड़ा बंपर कमाई कर सकते है 
राजस्थान के किशनगढ़ के पास रेनवाल के रहने वाले 45 वर्षीय नरेंद्र कुमार गर्व ने अपनी BA की पढ़ाई पूरी की और पिछले 10 वर्षों से अपने पिता के साथ एक किताबों की दुकान चलते थे और इसके साथ ही मोती की खेती भी करते है
नरेंद्र कुमार गर्व ने 40 हजार रूपये के निवेश से मोती की खेती की शुरुआत की और आज लगभग लाख रूपये का सालाना फायदा कमा रहे है नरेंद्र कुमार ने मोती की खेती करने के लिए पहले वीडियो देखा जिससे उन्हें पता चला की मोती को कृत्रिम रूप से उगाया जा सकता है नरेंद्र ने मोती की खेती के बारे में सिखने में अधिक समय नहीं लगा और इस खेती को सिखने के लिए उन्होंने 2017 में भुवनेश्वर के सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रेशवाटर एक्वाकल्चर (CIFA) में 'फ्रेश वाटर पर्ल फार्मिंग ऑन आंत्रप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट' से 5 दिन कोर्स किया 
नरेंद्र 2  प्रकार के मोती उगाते है डिफेंडर और गोल जिन्हें  क्रमश विकसित होने में 1 वर्ष और  1.5 वर्ष  का समय लगता है उन्होंने 10 × 10 फ़ीट के क्षेत्र में मोती की खेती करने के लिए 40000 रूपये का निवेश किया था जो उनको हर साल शून्य रखरखाव के साथ लगभग 4 लाख रूपये की आमदनी देता है 

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उन्होंने अपने घर में कृत्रिम तालाब बनाया और सर्जरी के सामना दवाइयां अमोनिया मीटर PH मीटर थर्मा मीटर जैसे कई आवश्यक उपकरण खरीदें  फिर उन्होंने मसल्स गोबर यूरिया और सुपरफास्ट से शैवाल के लिए भोजन तैयार किया तालाब में स्थान्तरित करने से पहले मसल्स को 24 घंटे तक रखा जाता है 
नरेंद्र ने बताया की पर्ल न्यूक्लियस को प्रत्येक मसल्स के अंदर सावधानी से डाला जाता है और पानी में डुबोया जाता है शैवाल को मसल्स के लिए भोजन के रूप में जोड़ा जाता है नरेंद्र ने मृत्यु दर से बचने के लिए चुना मिलाएं सबसे जरुरी बात यह है की आपको 1 साल के लिए धैर्य रखना है 
मोती तैयार होने पर नरेंद्र उन्हें एक लैब में भेजते है गुणवत्ता के आधार पर  एक मोती 200 रूपये से 1000 रूपये के बेच बेचा जा सकता है नरेंद्र हर साल 3000 मोती का उत्पादन करता है मसल्स की मृत्यु देर भी 70 % से घटकर 30 % हो गई है