Goat farming : बकरी के इन नस्लों से होगा अच्छा मुनाफा,इन नस्लों को मिली राष्टीय स्तर पर पहचान

 
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ग्रामीण इलाको में लोग बकरी पालन करके अच्छा पैसा कमा रहा है।इससे बेहद लाभ होता है।बाजार में बकरी के दूध और मास की मांग भी काफी ज्यादा है जिसके कारण बकरी पालन एक बहुत बड़े बिजनेस के रूप में उबर रहा है। बकरी पालन बिजनेस के लिए सरकार से भी लोन और सब्सिडी का फायदा मिल रहा है।बकरी पालन बिजनेस शुरू करने से पहले हमे बकरियों की नस्लों के बारे में जानकारी होना काफी जरुरी है।क्युकी बिजनेस में माल के रूप में हमारे पास बकरिया ही होती है।ये बिजेनस बकरी की नस्लों पर निर्भर है।अगर बकरियों की उन्नत नस्लों का चयन किया जाए तो अच्छा लाभ होता है।बकरी पालन के बकरियों की तीन नस्लों की पहचान की गयी है। यह राजस्थान की सोजत ,गुजरी ,करोली बकरी है। ये अलग अलग जिलों में पायी जाती है। तो चलिए जानते है बकरी इन नस्लों के बारे में। 

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बकरी पालन के लिए नई नस्ल सोजत बकरी - बकरी की सोजत नस्ल उत्तर पक्षिम शुष्क और अर्धशुष्क क्षेत्र में पायी जाने वाले नस्ल है। इसका उदगम स्थल सोजत और उसके आसपास का क्षेत्र है। इन नस्ल का मूल क्षेत्र पाली जिले की सोजत और पाली तहसील,जोशपुर जिले की बिलाड़ा और पीपाड़ तहसील है।यह नस्ल राजस्थान के पाली जोधपुर,नागौर और जैसलमेर जिलों तक फैली हुई है।यह नस्ल बकरी पालन द्वारा पसंद की जाती है। यह नस्ल की बकरी त्वचा की गुलाबी है कान लंबे है। इस नस्ल की बाकि का आकर माध्यम है। इसके शरीर पर सफेद में भूरे धब्बे होते है। इसके सींग ऊपर मुड़े हुए होते है। यह मास के लिए पाली जाती है। 

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करोली बकरी की नस्ल - इस नस्ल की बकरी राजस्थान के दक्षिण पूर्वी मैदानी इलाको में पायी जाती है।यह इस क्षेत्र की स्वदेशी नस्ल है। इस नस्ल का मूल क्षेत्र करोली जिले की सपोटरा,हिंडोन तहसील है।यह नस्ल सवाई माधोपुर,कोटा,बारा,बूंदी जिलों तक फैली हुई है।इसकी विशेषता यह है की इसका चेहरा,कान,पेट और पैर पर भूरे कलर की पट्टियों के साथ बकरी के रंग का पैटर्न काला है। सके कान लंबे,लटके हुए कानो पर भूरे रंग की रेखाओ से मुड़े होते है इसकी नाक रोमन होती है।इसके सींग मध्यम आकर के होर ऊपर से नुकीले है।