Honey Bee :अब साइंटिस्ट ने ईजाद कर लिया है मधुमक्खियों का सुरक्षा कवच,शहद के बिजनेस में नहीं होगा कोई नुकसान,जानिए इसके बारे में

 
j

पूरी दुनिया में शहद को चीनी के एक सब्सिट्यूट के तोर पर प्रयोग किया जाता है।ये पूरी तरह से नेचुरल होता है।शहद का सेवन करने से सेहत में कई लाभ होते है।इसे सेहत से जुडी समस्या दूर होती है।वही बाजार में शहद की मांग काफी ज्यादा रहती है ईरान,अमेरिका,भारत को शहद का सबसे बड़ा उत्पादक मानते है। साल 2020 में शहद उत्पादन 16 लाख 20 हजार मीट्रिक टन आँका गया है ,जिसमे कृषि उपजो ,वन्य पुष्पों और वन वृक्षों से लिया गया शहद भी जुड़ा है।इसका कारोबार टॉप है,लेकिन इस कारोबार में नुकसान की भी काफी संभावनाएं है।कई बार संक्रमण या बीमारियों की चपेट में आने से मधुमक्खियों की संख्या कम हो जाती है ,जिसका सीधा असर शहद के उत्पादन पर होता है। इस परेशानी पर कई देश रिसर्च कर रहे थे लेकिन अमेरिकी वेझेनिको ने मधुमक्खी को जीवनदान देने वाली वेक्सीन ईजाद कर ली है। 

यूएसडीए ने अप्रूव कर डी मधुमक्खियों की वेक्सीन 

अमेरिका शहद का बड़ा उत्पादक और नर्यातक है।यहाँ मधुमक्खी पालन बड़े पैमाने पर किया जाता है।अमेरिकी वेझेनिको ने अब मधुमक्खियों को बीमारी और संक्रमण से बचाने का टिका ईजाद कर लिया है,जिसे यूनाइटेड स्टेटस डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर से मंजूरी मिल गयी है। इस वेक्सीन को विकसित किया है बायोटेक कंपनी डालन एनीमल हेल्थ ने जो मधुमक्खियों ने पनपने वाली घटक बीमारी एएफबी की रोकधाम और बचाव में मददगार साबित होगी। 

कैसे काम करेगा ये वेक्सीन 

अमेरिका में कमर्शियल लेवल पर शहद की खेती करने वाले मधुमक्क्खी पलकों को जल्द ये वेक्सीन उपलबध करवाई जाएगी। इसकी मदद से बैक्टीरियम पेनीबेसिल्स लार्वा के कारण मधुमक्खी में होने वाले अमेरिकी फूल बृंद बीमारी को रोकधाम में खास मदद मिलेगी। बता दे की एएफबी बीमारी के कारण पीती सूजन कमजोर हो जाती है जिससे इनकी जान चली जाती है। also read : गाय,भैस के सींग कटवाने क्यों है जरुरी ?अगर नहीं कटवाए तो क्या होगा ??

क्या है ये अमेरिकी फूल बृंद बीमारी 

मधुमक्खी जीव विविधता का जरुरी हिस्सा है ,लेकिन बदलती जलवायु और प्राकतिक में हो रहे बदलावों का कुछ नकारात्मक प्रभाव इन मधुमक्खियों पर भी पड़ता है। इन्ही में शामिल है अमेरिकी फूल बृंद संक्रमण। जिससे मधुमक्खियों का लार्वा बुरी तरह से प्रभावित होता है। यह बैक्टीरियम पेनीबेसिल्स लार्वा के कारण से होता है। यह पर्यावरण में कई सालो तक पनपते के लिए बीजाणु भी उत्प्प्न करता है।