जानिए भारत की नकदी फसलों के बारे में

 
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किसान परम्परागत खेती को छोड़कर नकदी फसलों को उगाने में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे है किसान इन फसलों को बेचकर तुरंत नकदी राशि प्राप्त करता है नकदी फसलों में उन व्यापारिक फसलों में शामिल किया जाता है जिन के माध्यम से उद्योगों को कच्चा माल प्राप्त होता है पहले के समय में किसानों का नकदी फसलों की तरफ ध्यान कम था लेकिन इनको बेचने पर अधिक लाभ मिलने के कारण किसानों की रूचि नकदी फसलों की तरफ बढ़ी है आज हम आपको नकदी फसलों के बारे में बताएंगे 

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गन्ना की खेती 
आज के समय में हर इंसान गन्ना और इससे बनने वाले उत्पादों का इस्तेमाल करता है गन्ने का इस्तेमाल चीनी बनाने में सबसे ज्यादा किया जाता है गन्ना उत्पादन में भारत का ब्राजील के बाद दूसरा स्थान है जबकि चीनी की खपत में पहला स्थान है गन्ना एक उष्णकटिबंधीय फसल है भारत में सबसे ज्यादा गन्ना और चीनी उत्पादक राज्य UP है और दूसरे नंबर पर महाराष्ट्र है 
कपास की खेती 
भारत का सबसे बड़ा संगठित उद्योग कपड़ा उद्योग है कपड़ा उद्योग की अधिकांश जरूरतों को कपास से ही पूरा किया जा सकता है भारत में कपास की खेती का क्षेत्रफल विश्व में सर्वाधिक है कुल उत्पादन या प्रति उत्पादन के मामले में चीन के बाद इंडिया का दूसरा स्थान है कपास उत्पादन में गुजरात पहले स्थान पर है कपास की दो किस्में पाई जाती है देसी कपास और दूसरी अमेरिकन कपास 
जुट की खेती 
जुट एक रेशे दार फसल है इसके रेशे बोरे दरी तम्बू तिरपाल टाट पैकिंग के कपड़े कालीन पर्दे घरों की सजावट का सामना  आदि बनाने के काम आता है इसका डंठल जलाने के काम आता है जुट उत्पादन में पश्चिम बंगाल पहले स्थान पर है यहां कुल उत्पादन का 70 % जुट पैदा होता है 

चाय की खेती 
चीनी की तरह चाय भी आज हर घर की जरूरत बन गई है असम की सुरमा और ब्रह्मपुत्र की घाटी में चाय की खेती की जाती है विश्व के टॉप 3 चाय उत्पादक देशों में इंडिया दूसरे नंबर पर है चाय के पौधे से एक साल में 3 बार पत्तियां तोड़ी जाती है 

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कॉफी की खेती 
कॉफी को अरब से लाकर साउथ इंडिया में बाबा बुदन की पहाड़ी पर लगाया गया था इसका मूल स्थान अमेजन नदी की घाटी है विश्व में सबसे ज्यादा ख्वा का उत्पादन ब्राजील में होता है कहवा का पौधा 4 साल में एक बार कली देता है  
मूंगफली का खेती 
मूंगफली मूल रूप से ब्राजील की फसल है इंडिया में विश्व का 30 % भाग उत्पादित किया जाता है देश के कुल तिलहल का 45 % भाग मूंगफली से प्राप्त होता है मूंगफली का अधिकाशं इस्तेमाल तेल बनाने में किया जाता है राजस्थान के कई जिलों में इसकी भरपूर खेती होती है 

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सरसों की खेती 
सरसों की फसल को कम लागत में अधिक फायदा देने वाली माना गया है सरसों की खेती में सिंचाई की जरूरत नहीं होती है आज इंडिया के अधिकांश घरों में खाने के तेल के रूप में सरसों के तेल का इस्तेमाल किया जाता है सरसों के बीजों से तेल के अलावा खली भी निलती है जिसका पशु आहार के रूप में इस्तेमाल किया जाता है