जानिए सिंचाई करने की आधुनिक तकनीकी, पानी के साथ साथ समय और धन की होगी बचत, बढ़ेगा उत्पादन

 
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दुनिया में किसान पानी की समस्या जूझ रहे है। कई इलाकों का भूजल स्तर एकदम नीचे आ गया है। भारत में कई क्षेत्र ऐसे है जहां पानी की कमी हो गई है इस समस्या से निजात पाने के लिए सर्कार कई अभियान और योजनाए चला रही है। बारिश के पानी का सरंक्षण करने के लिए लोगो को प्रेरित किया जा रहा है। पानी की सबसे ज्यादा जरूरत कृषि में होती है। क्योकि अगर पानी नहीं होगा तो फसल का उत्पादन नहीं होगा।पुराने समय से ही खेती में पारंपरिक तरीकों से सिंचाई की जाती है, जिसमें पानी अनावश्यक तरीके से बह जाता है। कई बार इससे फसल को काफी ज्यादा नुकसान होता है लेकिन अब वैज्ञानिको ने सिंचाई की कई किस्में खोज ली है जो कि न केवल पानी, पैसा और समय बचाती है बल्कि फसल की अच्छी उत्पादकता भी देते है। 

कैसे करे सिंचाई 

  1. आपको ये जानकर के हैरानी होगी। लेकिन हर फसल के लिए सिंचाई का तरीका बिलकुल अलग माना जाता है। यदि एक फसल के लिए सही सिंचाई तकनीक का इस्तेमाल किया जाए तो खर्च करके उत्पादन में कई गुना बढ़ोतरी हो सकती है। इसके साथ ही आपको आपको सिंचाई तकनीक ड्रिप, मिनी स्प्रिंकलर, माइक्रो स्प्रिंकलर और पोर्टेबल स्प्रिंकलर हैं। 
  2. ड्रिप सिंचाई तकनीक को टपक सिंचाई पद्धति भी कहते हैं,  जो गन्ना से लेकर अनानास, पपीता, केला, आम, लीची, अमरूद, सब्जी, अनार, लत्तीदार फसल और प्याज की टिकाऊ खेती में मददगार है। 
  3. मिनी स्प्रिंकलर सिंचाई को फव्वारा सिंचाई भी कहते हैं, जिससे चाय, आलू, प्याज, धान, गेहूं आदि फसलों की सिंचाई करके कई हजार लीटर पानी की बचत कर सकते हैं। 
  4. माइक्रो स्प्रिंकलर सिंचाई को लीची, पॉलीहाउस और शेडनेट में खेती करने वाले किसानों के लिए फायदेमंद बताया जाता है।  इस तरह पानी की भी ज्यादा खपत नहीं होती और फसल की जड़ों तक सीधे सिंचाई हो जाती है। 
  5. पोर्टेबल स्प्रिंकलर सिंचाई तकनीक को दलहन, तिलहन और धान, गेहूं की सिंचाई के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। 

टपक सिंचाई के लिए सब्सिडी 
बिहार में टपक सिंचाई के लिए सात निश्चय-2 और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना चलाई जा रही है। इसके तहत ड्रिप सिंचाई पद्धति को अपनाया गया है इसके लिए सिंचाई पद्धति को अपनाने वाले किसानों को 40,000 रुपये तक सब्सिडी का प्रावधान दिया गया है। यानि इकाई लागत पर कुल 90% सब्सिडी दी जाती है। also read : 
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