जानिए केले की खेती करने का सही तरीका ,केले की कटाई से लेकर बुआई तक की पूरी जानकारी

 
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भारत में केले की खेती बड़े स्तर पर होती है किसान इसे अच्छी कमाई करते है लेकिन अधिकतर लोगो को इसकी कतई से लेकर पकने तक का सही तरीका पता नहीं है इससे बर्बादी का डर बना रहता है जो किसान को नुकसान पहुंचा सकता है केले का गुच्छा निकलने से लेकर पूर्ण परिपक्वता और गुच्छों की कतई तक 100 से 120 दिन तक का समय लगता है जब केले के छिलके का रंग गहरा हरे से हल्के हरे रंग में बदलने लगे या फलों पर बने कोनियता का गायब होने लगे तो किसान को तैयारी शुरू कर देनी चाहिए 

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केले के परिपक्क फलों को एक तेज चाकू से डंठल सहित काटा जाना चाहिए ताकि हेडलिंग और परिवहन में आसानी हो कटे हुआ फलों को सीधे मिटटी में रखने से बचना चाहिए क्योकि इससे फलों को हानि हो सकती हे और फल खराब हो सकते हे केला का गुच्छा काटने के बाद फलों को केले के पत्तों पर रखा जाना चाहिए कतई और परिवहन के समय ध्यान रखना चाहिए की फलों को कम से कम या नहीं के बराबर घाव पहुंचे गुच्छों को संभालने और परिवहन करते समय उचित देखभाल की आवश्यकता होती हे 
फलों को पकने के एक प्रक्रिया होती हे जिससे फल अपने वांछित स्वाद गुणवत्ता रंग प्रकृति और अन्य बनावटी गुणों को प्राप्त करते है पकना रचना में परिवर्तन से संबंधित है केला के फलों को पकने के लगभग सभी तरिके या तो पारंपरिक या आधुनिक रासायनिक होते है जो अपने गुणों या अवगुणों के साथ आते है प्राकृतिक स्थितियों में एथलीन पकने की प्रक्रिया में एक भूमिका निभाता है 
फलों को पकने के लिए एथिलीन का उपयोग एकमात्र सुरक्षित और विश्वव्यापी स्वीकृत विधि है जो की नियंत्रित तापमान और सापेक्ष आद्रता की स्थिति के अनुसार पकने के लिए प्राकृतिक हार्मोन है यह एक दी ग्रीनिंग इजिन्ट है जो छिलके को हरे रंग से परिपूर्ण पिले में बदल सकता है और फलों की मिठास और सुगंध को बनाए रखता है पतला एथिलीन गैस मिश्रण का उपयोग शुद्ध एथिलीन का उपयोग करने की तुलना में अधिक सुरक्षित है 

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1 लीटर पानी में एथ्रल सोल्यूशन के 1 मिली में कच्चे केला के फलों को डुबो देते है और इसे सूखा दे इस विधि से फल दो दिन में पाक जाते है दूसरी विधि है जिस्मने 10 मिलीलीटर एथ्रल और 2 ग्राम सोडियम हाइड्रोक्साइड छर्रों को एक चौड़े मुहं वाले बर्तन में 5 लीटर पानी में मिलाया जाता है इस बर्तन को पकाने के फलों के पास अंदर रखा जाता है और कमरे को एयर टाइट किया जाता है फलों का पकना लगभग 12 से 24 घंटे में हो जाता है 
कागज के ठेले के अंदर कच्चे केलों को रख दें केले में गैस होती है जो की बेग के अंदर पकने का कार्य करती है इसकेलिए केले को किसी कपड़े में लपेटकर कागज में रख दे इससे केले जल्दी से पाक जाएंगे 
कैल्शियम कार्बोहाइड्रेड से कभी भी किसी फल को नहीं पकाना चाहिए कैल्शियम कार्बोहाइड्रेड एक बार पानी में घुल जाने पर एसिटिलीन का उत्पादन करता है इस रसायन का उपयोग अधिकाशं देशों में अवैध है आर्सेनिक और फास्फोरस विषैले होते है और एक्सपोजर गंभीर हेस्ट का खतरनाक कारण बन जाते है