बासमती चावल के बेहद शौकीन है भारत के लोग, यहाँ जानिए कैसे करे नकली और असली की पहचान

 
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गेहूं हो या फिर चावल से ही खाद्यान्न हो तो सेहत के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है। यदि दाल चावल गेहूं जैसे खाद्यान्न मिलावट भरे हो तो सीधे तौर पर सेहत पर असर पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सेहत को स्वस्थ रखने के लिए मिलावट युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए। बाजार में दाल चावल के मुंह में किसी तरह की मिलावट नहीं हो इसको लेकर खाद्य सुरक्षा एजेंसियां मानक तय करती है। आज इस पोस्ट में हम आपको मिलावटी चावल के बारे में जानकारी देने वाले हैं तो आइए जानते हैं। 

बासमती चावल की पहचान के मानक 
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने बासमती चावल के असली और नकली की पहचान के लिए पहली बार मानक जारी किए गए हैं। सुगंध पॉलिश समेत अन्य मापदंडों को असली और नकली लेकर तय किया गया है कि यह सभी मानव इस साल अगस्त से प्रभावी हो जाएंगी। केंद्र सरकार के स्तर से स्पष्ट रूप से यह कहा गया कि जो भी उन मानकों का पालन नहीं करेगा इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। 

नए मानकों के मुताबिक बासमती चावल में उसकी प्रमुख विशेषताओं की प्राकृतिक सुंगध हो रहेगी। इस चावल में कृत्रिम रंग पॉलिशिंग एजेंट और कृत्रिम सुगंध  बिल्कुल नहीं होती है यह भी ध्यान रखना है कि अनाज की तरह चावल का भी बिना पकाए आकार कितना होगा वह पकाने के बाद कितना बड़ा होना चाहिए। चमक के लिए रंगों का प्रयोग नहीं होना चाहिए। 

इन चवालों में लागू होंगे मानक
जिन चावलों पर मानक लागू होंगे. उन बासमती चावल में ब्राउन बासमती चावल, मिल्ड बासमती चावल, उसना भूरा बासमती चावल और मिल्ड उसना बासमती चावल शामिल हैं। FSSI के मानकों को भारत के राजपत्र में अधिसूचित खाद्य सुरक्षा और मानक प्रथम संशोधन विनिमय में 2023 के माध्यम से भी जारी कर दिया है। इस तरह के स्पष्ट पहचान मांगो की व्याख्या प्राधिकरण के स्तर से पहली बार की गई है। also read : 
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