आलू के इन किस्मो से होगा अच्छा पैदावार,जानिए इनके बारे में

 
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आलू का सेवन करना ज्यादातर लोगो को पसंद है।इससे कई अलग अलग चीजे बनती है। ऐसे में आलू की खेती से किसान को काफी अच्छा लाभ होता है।आलू रबी की फसल में आता है लेकिन इसकी खेती 12 महीने की जा सकती है।इसकी मांग भी बाकि सब्जियों से ज्यादा है।अगर अच्छी किस्म के आलू होते है तो उनकी कीमत अच्छी मिल जाती है।इसलिए आलू की बुवाई करते समय किसान आलू की किस्मो के चुनाव पर भी ज्यादा ध्यान देते है। कई बार खराब किस्मो के कारण किसान को नुकसान होने लगता है।ऐसे में परेशानी से बचने के लिए किसानो को आलू की ऐसी किस्मो का चयन करना चाहिए जिनसे बेहतर उत्पादन मिल सके।तो चलिए जाते है आलू की अच्छी पैदावार दने वाली इन किस्मो के बारे में। 

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आलू की नीलकंठ किस्म - कुफरी नीलकंठ उत्तर भारतीय के लिए जारी की गयी है।आलू की यह किस्म एंटीऑक्सीडेंट गुणों से युक्त होती है।  जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।इस किस्म के आलू संकर कद उत्कृष्ठ स्वाद के साथ गहरे बैगनी काले कलर के लिए होते है।यह पकाने में सरल होते है।आलू की इस किस्म में 350 -400 किवतल प्रति हेक्टेयर तक पैदावार प्राप्त की जा सकती है। यह किसम पंजाब ,हरियाणा,उत्तर पदेश के मोदी इलाको में होते है। 

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कुफरी मफान किस्म - इस किस्म के आलू सुंदर सफ़ेद,अंडाकार,उथली आँखे व गुदा सफेद होता है।यह मध्यम अवधि वाली किस्म है। यह फसल 90 से 100 दिनों में तैयार हो जाती है। इस किस्म से 350 से 400 किवंटल प्रति हेक्टर तक पैदावार प्राप्त कर सकते है। इस किस्म में शुष्क पदार्थ की मात्रा 15- 10 प्रतिशत होती है और इसकी भडारण क्षमता अच्छी है।इस किसम की सबसे बड़ी खास बात यह है की इस किस्म पर पाले का प्रभाव नहीं पड़ता है। यह किसम मैदानी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है।