कोबरा का यह पौधा औषधि गुणों से है भरपूर,दूर होती है कई समस्या,जानिए इसके बारे में

 
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आजकल ज्यादा उचाई वाले क्षेत्रों में कोबरा प्लाट या व्हीपकोर्ड कोबरा लिली खूब खिल रहा है यह सप फन की तरह नजर आता है इसकी पत्तिया पारदर्शी ट्यूब की तरह व ऊपरी भाग गुब्बारे की तरह फुला रहता है इसी गुब्बारे समान भाग के थोड़स निचे एक खुला भाग होता है जिसमे से साप की जीभ की तरह एक पत्ता निकला होता है ऐसे में आपको बता दे चिकित्सा के अनुसार इसकी जड़ो और तनो को ओषधि पोधो के लिए प्रयोग किया जाता है इसका प्रयोग मवेशियों में पेट की कीड़ो को दूर करने के लिए किया जाता है और किसी भी परजीवी को मारने के लिए इसके रस को मवेशियों के घावों पर लगा सकते है 

इस पौधे को कम लोग जानते है ये समुन्द्र तल से लगभग 2000 से 3300 मीटर की उचाई पर इसके पौधे उत्तरकाशी जिले में नजर आते है इस पौधे की संभावित और जहरीला प्रकृति के कारण ,इसका इस्तेमाल केवल एक योग्य चिकित्स्क या जानवर की देखरेख में आंतरिक रूप से किया जाना चाहिए 

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आपको बता दे इसकी लगभग 183 प्रजातिया है जिनमे 14 प्रजातिया सिर्फ उत्तराखंड हिमालय में मौजूद है उच्च हिमालय झीलों व बांज,बुरांश व देवदार के जंगलो में ज्यादा नजर आते है।इस पौधे की जड़ का इस्तेमाल कई चीजों में किया जाता है इसको वसंत के शुरूआती दिनों में कटा जाता है और बाद में इस्तेमाल के लिए सुखाया जाता है इसकी सुखी जड़ो का औषधि में इस्तेमाल किया जाता है ये पेट दर डंसृप दंश,अपच,कुत्ते के काटने और लिवर से जुडी समस्या होने पर ठीख किया जाता है