शरद ऋतू में खीर खाने से मलेरिया का खतरा होगा कम,सेहत के लिए बेहद फायदेमंद

 
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इन दिनों मौसम बदल रहा है इस मौसम के कभी बारिश तो काफी गर्मी रहती है और सर्दियों का मौसम धीरे धीरे शुरू हो रहा है। वही बारिश के कारन मच्छरों समस्या ज्यादा रहती है .इस मौसम में हवा ठंडी चलने लगी है इस बदलते मौसम में मच्छरों की प्रजनन रफ्तार फिर से बढ़ जाता है इस मौसम में मलेरिया की परेशानी का खतरा ज्यादा रहता है.लेकिन मलेरिया से बचने से आप खीर जैसा टेस्टी भोजन करे.शरद ऋतू में खीर खाना मलेरिया से बचने का सबसे सरल उपाय है.मलेरिया इस बदलते मौसम में ही होता है। तो चलिए जानते है खीर मलेरिया से कैसे बचा सकती है ?? 
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शारद ऋतू में दूध और चावल की बनी खीर खाने से मलेरिया होनी की समस्या कम हो जाती है.अगर आपको डायबिटीज की परेशानी नहीं है और परिवार में किसी को नहीं है तो इस मौसम में आप हर दिन दूध और चावल से बनी खीर का सेवन करे .शरद दूध में दूध और चावल की बनी खीर खाने से मलेरिया का  खतरा कम होता है। 

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दूध और चवल से बनी खीर पित शामक होती है .यानि शरीर में बढ़ी हुई पित्त की मात्रा को कम करती है और पित्त बनने की प्रक्रिया को कम करती है .तेज उमस और गिरते तापमान के कारन यह शरीर के अंदर हो रही रायसनिक क्रियाओ में संतुन बनाए रखने का काम करती है .लेकिन ध्यान रखे की खीर सफेद चावलों से बनी होनी चाहिए.इसमें चावल और दूध के अलावा कुछ नहीं मिलाना है .इस खीर का फायदा सबसे ज्यादा तब मिलता है जब खीर बनाने में देसी गाय के दूध का इस्तेमाल किया जाए।