मौत से मिलकर लौटने पर केसा लगा,इतने मरीजों का है अनुभव - लगता है शरीर से दूर जा रहे है

 
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दिल को दौरा पड़ने के बाद कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन देकर बचाये गए हर पांच से से एक व्यक्ति को मोत करीबी अनुभव होता है। इस दौरान पीड़ित को एहसास होता है की वह शरीर से अलग होकर दूर जा रहा है।उसकी आँखों के समाने पूरी दुनिया रील की तरह घूमने लगती है। 2017 से 2020 तक पहली बार इस तरह की स्टडी की गयी ,जिसमे 567 मरीजों को शामिल किया गया। इन लोगो को धड़कन रुकने के बाद CPR देकर बकाया गया था। सभी मरीज अमेरिका और इग्लेंड के हॉस्पिटल में भर्ती थे। 

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रिचर्च में जुड़े लोगो को कहना है की सीपीआर के दौरान उनकी आँखों की रौशनी स्पष्ट थी और उन्हें सब कुछ रगीन और चमकीला दिखाई देने लगा। उचाई से गिरने,जानलेवा हमले और धमाके के दौरान भी मोत के करीबी अनुभव होते है। रिचर्च में शामिल एक व्यक्ति के जानकारी दी सीपीआर देने पर वह एक अँधेरी जगह में चला गया,लेकिन उसे डर नहीं लग रहा था।वहा बहुत शांति थी।फिर उसकी आँखो के समाने पूरी जिंदगी ट्री -डी फिल्म के तरह चलने लगी। बचपन से लेकर जवानी तक का घटनाक्रम साफतौर पर सामने आया। 

मरीजों पर हुए ब्रेन स्कैन में यह सामने आयी की सीपीआर देते समय मरीजों के दिमागों की गतिविसधिया भी बढ़ गयी।एक घंटे तक उनके दिमाग से गामा,डेल्टा,थीटा,अल्फ़ा और बीटा तरंगे निक रही थी।ब्रेन में यह तरंगे तब निकलती है जब व्यक्ति होश में आता है तो और सोच रहा होता है। लेकिन कड़ीएफ अरेस्ट में सीपीआर के दौरान पहली बार इन्हे एक्टिव पाया गया। 

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अक्सर यह माना जाता है की कार्डिएक अरेस्ट में मरीज बेहोश हो जाते। मगर यह स्टडी कुछ और ही साबित कर रही है।एक्सपर्ट के मुताबित यह जानना जरुरी है की क्या सीपीआर के समय मरीजों को नजदीक की चीजों के बारे में जानकरी थी।सीपीआर अगर किसी इंसान के दिल की धड़कने बंद हो जाए तो घर से अस्पताल जाने के समय सीपीआर लाइफ सेविंग का काम करता है।