UPSC succes story : बड़े भाई ने अपनी नौकरी छोड़ कराई थी सबको तैयारी,अब चारो भाई बहन IAS -IPS

 
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घर में जितने बच्चे हो और सब के सब सरकार में टॉप लेवल के अफसर बन जाए तो उस घर का माहौल लग हो होगा।तो चलिए जनते है ऐसी ही कहानी के बारे में जिस घर के 2 भाई और 2 बहन आईएएस और आईपीएस ऑफिसर है।यह कहानी यूपी के लालगंज की है। 

चार भाई बहनो में क्षमा और माधवी की बहने उदास दिख रही थी,क्युकी वे  युपीएससी सीएसई परीक्षा पास करने में असफल रही थी,उनके भाई योगेश उन्हें दिखी नहीं देख पा रहे थे और उन्होंने उनकी मदद करने का फैसला किया। रक्षाबंधन के अवसर पर सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने खुद यूपीएससी के लिए उपस्थित होने का फैसला किया,यह पता लगाया है परेशानी क्या थी,और अपनी बहनो का मार्गदर्शन किया। also read : जब किसान का बेटा यूपीएससी पास कर बन गया IFS अफसर तो तो पहली बार माता पिता पहुंचे ऑफिस

उन्होंने 2013 में अपनी नौकरी छोड़ दी और एक साल पूरी तरह यूपीएससी पर ध्यान दिया।अगले साल उन्होंने इसे पहले ही अटैम्प्ट में पास कर लिया ओट आईएएस अधिकारी बन गए।उन्होंने एग्जाम और नोट्स की अपनी समझ से अपनी दो बहनो और छोटे भाई को कोचिंग दी। 2015 में माधवी ने परीक्षा पास की और आईएएस अधिकारी बन गयी। गले साल,क्षमा और लोकेश दोनों ने एग्जाम क्लियर किया और अब आईपीएस और आईएएस अधिकारी है। 

सबसे कम उम्र के लोकेश का कहना है की 80 और 90 के दशक में एक गांव लालगंज में बड़े होने वालो के लिए एक निम्र माध्यम वर्गीय परिवार में यूपीएससी को सरकारी सेवा का सपना माना जाता था।लेकिन जहा उनके माता पिता हमेशा चाहते थे की बे परीक्षा दे,उन्होंने कभी भी अपने सपनो को अच्छे बच्चो पर नहीं थोपा।चारो भाई बहन 12 वि तक हिंदी मीडियम से ही पढ़े है। 

योगेश अपनी इंजीनियरिंग के लिए प्रयागराज में मोतीलाल नेहरू पोधोगिकी संसथान गए। उन्होंने यूपीएससी में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई और नोएडा में एक सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करने चले गए ,लेकिन जब उनकी बहने जो सिविल सेवा परीक्षा पास करने की इच्छुक थी उनको परेशानी आ रही थी तो वह खुद बढ़ाओ का सामना करते हुए मैदान में आ गए।बच्चो को माँ कृष्ण कागती है 'हमारे बच्चे हमेशा मेहनती और इमानदर रहे है। एक परीक्षा देने के बाद उन्होंने हमें बताया की यह अच्छी थी या नहीं।उन्हें उनकी डंडा के लिए रिवार्ड मिला है।