पाकिस्तान को चीन से मिलने वाली है J-10 की दूसरी खेप,जानिए चीन का J-10 लड़ाकू विमान कितना ताकतवर है

 
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पाकिस्तान को अपने सदाबहार दोस्त चीन से j10 लड़ाकू विमान की दूसरी खेप मिलने वाली है।चीन का जे 10 इजरायल के पुराने लड़ाकू विमान आईएआई लवी का एक कॉपी है। इस खेप में 8 लड़ाकू विमान जुड़े हुए है। चीन ने पहली खेप में 6 लड़ाकू विमान पाकिस्तान को सोपे थे। पाकिस्तान ने चीन से कुल 36 j -10 लड़ाकू विमान खरीदने का सौदा किया था। इन लड़ाकू विमानों से पाकिस्तानी वायु सेना में दो स्क्रॉडन बनाये जाएगे,जिनकी तैनाती भारत से लगी सिमा पर की जाएगी। 

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चीन का 10 लड़ाकू विमान इजरायल तकनीक पर आधारित है। इजरायल ने करोडो डॉलर के इस प्रोजेक्ट को साल 1987 में बंद कर दिया था। इस प्रोजेक्ट को बंद करने के लिए तत्कालीन इजरायली प्रधानमंत्री यित्जाक श्मीर की केबिनेट के 13 में से 12 मंत्रियो ने अपना समर्थन दिया था। खबरों के अनुसार इजरायल में आईएआई लवी प्रोजेक्ट को तत्कालीन अमेरिका राष्टपति रोनाल्ड रीगन के दबाव में बंद किया था। रीगन प्रशासन ने इजरायल के इस प्रोजेक्ट को इसलिए बंद किया ताकि दोनों देश साथ मिलकर भविष्य के लिए नया विमान विकसित कर सके। 

चीन के पास चेंगदू j 10 विमान ही सबसे बड़ी संख्या में है। लगभग 488 J 10 वेरिएंट चीनी वायु सेना और चीनी नौसेना की एविएशन विग में जुड़े हुए है। जे 10 में 11 हाईपाइंट,एक एक्टिव इलेक्ट्रॉनिक सकेंड एरे रडार और एक 23 एमएम की गन लगायी गयी है। ऐसा माना जाता है की यह मेक 2 की स्पीड से लगभग 60,000 फिट की ऊँची उड़ान भर सकता  है। 

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राफेल में भारत की जरूरतों के अनुसार से बदलाब किया गया है। राफेल की रेंज 3,700 किलोमीटर है। यह लड़ाकू विमान अपने साथ अलग अलग तरह की कई मिसाइलों को लेकर उड़न भर सकता है। राफेल की लंबाई 15.30 मीटर और उचाई 5.30 मीटर है। राफेल का विग्सपेन सिर्फ 10.90 मीटर जा जो इसे पहाड़ी इलाको में उड़ने के लिए आदर्श एयरक्राफ्ट बनाता है। विमान छोटा होने से उसकी मनुवारिंग में आसानी होती है। राफेल इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर टेक्नोलॉजी के अनुसार से दुनिया में सर्वोतम लड़ाकू है। इसके आलावा भारत के राफेल में हवा से जमीन पर मार करने वाले बेहद घटक स्केल्प मिसाइल को भी फायर किया जा सकता है।