आखिर गोल्फ बॉल के क्यों बनाए जाते है डिंपल्स जानिए इससे जुडी रोचक कहानी

 
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आज तक आपने लोगों के फेस पर पड़े डिंपल्स के बारे में जरूर पढ़ा होगा ये वैसे तो लोगों के फेस और उसकी मुस्कान को आकर्षक बनाते है लेकिन अगर मेडिकल्स की दृष्टि से देखें तो यह एक बीमारी है आज हम फेस के डिंपल नहीं बल्कि गोल्फ बॉल्स पर मौजूद डिंपल्स के बारे में बात करने वाले है गोल्फ बॉल्स में छोटे -छोटे गढ्ढे होते है आज हम आपको बताएंगे की यह छोटे छोटे गढ्ढे क्यों होते है 

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अगर गोल्फ बॉल्स के इतिहास को देखें तो सदियों पहले बॉल्स चिकने हुआ करते थे इसकी वजह से ये आसानी से सरकते हुए एक से दूसरे जगह चले जाएं इससे गोल्फ खेलने में आसानी होती फिर पता चला की यह लॉजिक गलत था बॉल की चिकना होने से इसका सरकने से कोई मतलब नहीं 1990 के दौर में गोल्फ काफी पसंद किया जाता था उसी समय इसके डिजाइन में बदलाव किया गया जिसे अभी तक माना जाता है इन गड्ढों की वजह से गोल्फ में क्रांति आ गई 

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गोल्फ बॉल में गड्ढे बनाने का विचार सबसे पहले एक इंजीनियर के माइंड में आया था उसने देखा की चिकने बॉल में जो भी पुराने हो जाते है वो ज्यादा दूर तक जाते है इसके पीछे वजह समझ आई की पुराने गेंदों में गढ्ढे हो जाते है इससे वो ज्यादा दूर जा पाते है इसी वजह से ब्रिटिश इंजीनियर विलियम टेलर ने ऐसे गोल्फ बॉल्स बनाना शुरू किया जिसमें डिंपल होते है यह बॉल्स तुरंत की गोल्फर्स की पहली पसंद बन गई 
एक बार गोल्फ बॉल्स में गड्ढे बनने लगे उसके बाद तो इसके कई डिजाइन सामने आए अलग -अलग पैटर्न के गोल्फ बॉल्स आने लगे इससे बॉल ज्यादा दुरी तक सरकने लगे आज के समय में बनने वाले ज्यादातर गोल्फ बॉक्स में करीब  तीन से पांच सौ गड्ढे होते है किसी किसी बॉल में 1000 गड्ढे भी होते है जिस बॉल के नाम सबसे ज्यादा गड्ढे का रिकॉर्ड है उसमें 1070 शामिल है