क्या आप भी जानते है इस प्राचीन किले के बारे में,जिसे अकबर भी नहीं जित पाया,अग्रेजो ने लुटे खजानो से भरे कुए,कई एकड़ में है फैला

 
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भारत में ऐसे कई प्राचीन किले है जिनका इतिहास बेहद समृद्ध है और कई तो इतने पुराने है की इनके बारे में अब भी सही जानकारी नहीं है। ऐसा ही एक किला है जिसे अकबर भी नहीं जीता पाया था। यह किला भारत के सब पुराने किलो में शामिल है। यह प्रचीन किला कब बना इसे लेकर कोई जानकारी नहीं है। किला 463 एकड़ में फैला हुआ है और साल 1905 में आये जबरदस्त भूकंप ने इस किले की नीव को हिलाकर रख दिया था।अब यह किला ऐतिहासिक स्मारकों और किलो को देखने के शौकीन टूरिस्ट के बिच काफी पसंद किया जाता है। 

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इस किले का नाम कांगड़ा का किला है। यह किला हिमाचल प्रदेश में है।किला धर्मशाला से लगभग 20 किमी दूर है। इस किले से सैलानी धौलाधार के खूबसूरत नज़ारे देख सकते है। यह किला लगभग 3,500 साल पहले कटोच वंश के महाराजा सुशर्मा चंद्र ने बनवाया था।सुशर्मा चंद्र ने महाभारत की लड़ाई में कौरव राजकुमार केखिलाफ लड़ाई लड़ी थी। ऐसा कहा जाता है की युद्ध खत्म होने के बाद वो सेनिको के साथ कांगड़ा चले गए थे।सिकंदर से लेकर महमूद गजनी और अकबर ने भी इस किले पर कब्ज़ा करने का प्रयास किया था। 

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इस किले पर सबसे पहले हमला कश्मीर के राजा श्रेष्ठा ने 470 ईस्वी में किया था।महमूद गजनी ने 1000 ईस्वी के करीब किले में मौजूद खजाने के लिए इस पर चढ़ाई की। इस किले को लेकर कहा जाता है की यहाँ 21 खजाने के कुए है जिनमे से कई खजानो के कुओ को ब्रिटिशो ने लूट लिया था। वही 1615  ईस्वी में मुग़ल सम्राट अकबर ने इस किले को जितने के लिए घेरबंदी की पर वो असफल रहा। अकबर के बेटे जहाँगीर ने चंबा के राजा को मजबूर करके इस किले पर कब्ज़ा कर लिया था। यह किला मुगलो से कटोच वंश के अधिकार में आ गया था। इसके बाद इस किले को सिख राजा महाराजा रंजीत सिंह ने जीता और उसके बाद यह किला अग्रेजो के अधीन हो गया।