शाहजहां के आखिरी समय की ये दास्तां,एक बुर्ज में कैद रहा था ताजमहल बनवाने वाला शहंशाह जानिए पूरी कहानी

 
pic

एक शहंशाह के बनवाकर हसीन ताजमहल सारी दुनिया को मुहब्बत की निशानी दी है बॉलीवुड की फिल्म का ये गाना सभी की जुबां पर उस गूंजा था लेकिन ताजमहल बनवाने वाले शहंशाह शाहजहां के जीवन के आखिरी लम्हों की कहानी बहुत भावुक करने वाली है

pic
दुनिया को ताजमहल देने वाले शाहजहां को लाइफ के अंतिम 8 वर्ष कैद में बिताने पड़े थे उसे उसके ही बेटे औरंगजेब ने आगरा किला में बंदी बनाया था मुसम्मन बुर्ज से अपनी बेगम मुमताज महल के मकबरे को देखते हुए ही उसने अंतिम सांसे ली थी शाहजहां  का यह किस्सा गाइड जब सुनाते है तब ये दास्तां पर्यटकों को भावुक कर देती है 
शाहजहां के बीमार पड़ने के बाद उसके पुत्रों में सत्ता के लिए संघर्ष हुआ था शाहजहां अपने बड़े पुत्र दाराशिकोह को अपने बाद गद्दी पर बैठना चाहता था सत्ता के लिए संघर्ष में औरंगजेब की विजय हुई और उसके दर्शिकोह को मरवा दिया शाहजहां को उसने वर्ष 1658 में आगरा किला में बंदी बना लिया बंदी काल में शाहजहां आगरा किला स्थित मुसम्मन बुर्ज से ताजमहल को निहारा करता था यही जनवरी 1666 से उसकी मौत हो गई 
आगरा किला में बेइंतहा खूबसूरत मुसम्मन बुर्ज का निर्माण शाहजहां ने सफेद संगमरमर से कराया था मुसम्मन बुर्ज अष्टकोणीय है जो यमुना किनारा की तरफ बना हुआ है आगरा किला में सबसे अधिक ऊंचाई पर बना यह भवन पूर्व मुखी है इसमें पच्चकारी  का आकर्षक काम है जिसमें कीमती पत्थर जड़े हुए है 

pic
बुर्ज में सामने की तरफ बने फुव्वारे सभी को आकर्षक करते है यहां पच्चीकारी के काम को देख पर्यटक चकित हो जाते है मुसम्मन बुर्ज में पर्यटकों का प्रवेश प्रतिबंधित है वो बाहर से ही स्मारक को देख सकते है 
आगरा किला में इंडियन पुरातत्व सर्वेक्षण द्वार लगाए गए सांस्कृतिक नोटिस बोर्ड के अनुसार मुसम्मन बुर्ज को शाह बुर्ज या झरोखा भी कहा जाता था इसका निर्माण शहंशाह अकबर ने झरोखा दर्शन के लिए रेड सैंड स्टोन से कराया था वो यहीं से सूर्योदय के समय सूर्योपासना किया करता था जहांगीर भी इसका इस्तेमाल झरोखे के रूप में करता था वर्ष 1632 -40 के दौरान शाहजहां ने इसका निर्माण करवाया था औरंगजेब की कैद में वर्ष 1658 से 1666 तक शाहजहां यही निवास किया था