क्या आप भी जानते है सर्दियों में चाय के साथ पसंद किए जाने वाले पकोड़े कब और कहा से निकले,जानिए

 
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पिजा बर्गर और दूसरी चीजों का सेवन करना ज्यादातर लोगो को पसंद है।लेकिन स्वाद तो भारतीय खाने में ही आता है।फिर चाहे वो पारंपरिक मिठाईया हो या कुछ ऐसी डिसेज,जिनका स्वाद चाय के साथ लिया जाता है।चाय की बात आती है पकोड़े भी याद आते है।सर्दी का मौसम है इस मौसम में चाय के साथ पकोड़ो का सेवन करना सभी लोगो को पसंद है।तो चलिए जानते है समोसे की तरह पकोड़े कही बहार से आये या अपने देश के लोगो ने करारे पकोड़े का अविष्कार किया है। पकोड़े की बात करें तो इन्हे अलग अलग अलग नाम से जानते है।कोई पकोड़े को पकोड़ी कहते है,तो कही पकोरा,कुछ लोग भजिया बोलते है तो कुछ पुकरा या फुकरा भी कहते है।बारिश का मौसम हो या सर्दी का चाय के साथ पकोड़े मिल जाये तो चाय का मजा दोगुना हो जाता है। लेकिन क्या आप जानते है आलू पेज के स्वादिष्ट पकोड़े हमारी प्लेट तक पहुंचे कैसे ?? also read :  क्रिसमस की ख़ुशी बाटने के लिए इस आसान रेसिपी से बनाए ड्राई फ्रूट्स केक

शुद्ध भारतीय व्यजन है पकोड़ा 

पकोड़े को जब भी सेवन करते है तो शान से खा सकते है क्युकी ये शुद्ध तोर पर देसी व्यंजन है।सस्कृत में इसे 'पकवाट ' कहते है ,जिसका जिक्र वेद पुराणों में हो सकता है।पका का अर्थ यहाँ पका हुआ और वटा का रथ छोटे टुकड़े से है। पकोड़ा मूलरूप से शाहकारी व्यंजन है ,लेकिन मुगलो के आने के बाद शाही बावर्चियों ने अंडे से लेकर चिकन,मटन तक के पकोड़े बना डाले। इसी दौरान पक्क्वट से ये पकोरा हो गया। द्रविड़ियन यानि तमिल भाषा में ये हमेशा पकोड़ा ही रहा लेकिन अलग अलग हिस्सों में इसे अलग अलग नाम से जाना गया है। 

कब बने हमारे पसंदीदा आलू के भजिए

देश में लोगो को आलू प्याज के पकोड़े काफी पसंद आते है,लेकिन ये पहली बार तब बने जब पुतर्गाली 16 वि सदी में आलू लेकर आये।आलू प्याज के पकोड़े हमारे देश में सांसे ज्यादा पसंद किये जाते है।अपने देश के अलावा ब्रिटेन और अमेरिका तक लोगो को ये डिश पसंद आती है।चीन अफगानिस्तान,मलेशिया और नेपाल में भी ये स्ट्रीट फुस के तोर पर बिकते है जबकि सोमालिया ने इसे कहा भी भजिया जाता है कई फ़ूड चेन्स में पकोड़ो को ही अलग अलग नाम से बेचा जाता है,लेकिन हैरान करने वाली बात यह है की भारत के इस ओरिजनल डिश का पेटेंट तक नहीं है।