भूलकर भी ना रखे घर का अनाज इस दिशा में, मां लक्ष्मी हो सकती है नाराज

 
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वास्तु शास्त्र में घर से जुड़ी हर छोटी-बड़ी बात के बारे में बताया गया है। इन्हीं में से एक है घर का अनाज। आज हम आपका साक्षात्कार इस विषय पर करने जा रहे हैं कि घर की किस दिशा में अनाज रखना शुभ माना जाता है और इसके सकारात्मक प्रभाव के कारण आपके घर में अनाज का भंडार बना रहता है।

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वास्तु शास्त्र में अनाज को भरा रखने के लिए वास्तु नियम

पहले के समय में पूरे साल अनाज इकट्ठा करने की प्रथा थी। आज के समय में लोग साल भर का अनाज घर पर नहीं लाते हैं, लेकिन मुझे यकीन है कि आप में से कई लोग ऐसे होंगे जिन्हें पूरे महीने का राशन एक साथ घर पर ही रखना होगा।हमारे विशेषज्ञों के अनुसार, वास्तु शास्त्र में अनाज को भरा रखने के लिए वास्तु नियम बनाए गए हैं, जिनका पालन करने से न केवल अनाज का भंडार हमेशा भरा रहता है बल्कि घर की आर्थिक स्थिति में भी सुधार होता है।

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दिशा में अनाज रखने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं

आमतौर पर लोग किचन में ही अनाज भरकर रख देते हैं।ऐसे में किचन की उत्तर-पश्चिम दिशा यानी वायव्य कोण सबसे अच्छा माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार रसोई घर की उत्तर-पश्चिम दिशा में अनाज रखने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में कभी भी धन और अन्न की कमी नहीं होती है।

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दक्षिणा दिशा को यम की दिशा कहा जाता है

इसके अलावा अगर कोई खाद्य पदार्थ है जिसे लंबे समय तक रखना है तो उसे कमरे के दक्षिण-पश्चिम कोने में रखना चाहिए। वास्तु के अनुसार दक्षिणा दिशा को यम की दिशा कहा जाता है और अगर इस स्थान पर अनाज रखा जाए तो व्यक्ति के जीवन में कभी कोई संकट नहीं आता है और यमदेव की कृपा भी बनी रहती है।वहीं यदि आप अनाज को स्टोर रूप में रखना चाहते हैं तो इसके लिए भी वायव्य कोण सर्वोत्तम माना जाता है।वास्तु के अनुसार घर के उत्तर-पूर्व कोने में जिस घर में स्टोर रूम होता है वह हमेशा अना से भरा रहता है और ऐसे घर में जाने वाले व्यक्ति को कभी भूख नहीं लगती है।