माघ मास का पवित्र महीना शुरू,भगवान विष्णु के माधव रूप की पूजा का विधान,स्नान दान से मिलता है कई यझ करने जितना पुण्य

 
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हिन्दू धर्म में माघ मास का महीना शुरू हो चूका है।यह 7 जनवरी शनिवार से शुरू हो गया है। जो की 5 फरवरी रविवार तक रहेगा। इस महीने के स्वामी माधव है।ये भगवान विष्णु और कृष्ण का ही नाम है।इस महीने सहस्त्रांशु नाम के सूर्य की पूजा करने का विधान अग्नि पुराण में बताया गया है।माध मास में भगवान विष्णु,कृष्ण और सूर्य पूजा की परंपरा है।ऐसा करने से जाने अनजाने में हुए पाप खत्म हो जाते है।इसलिए माघ मास को पाप खत्म करने और पुण्य देने वाला महीना कहा गया है।ज्योतिष के अनुसार इस पवित्र महीने में स्नानं का बेहद महत्व है। यानि माघ में पवित्र नदियों के जल से नहाना चाहिए।ऐसा नहीं कर पाए तो घर पर ही गंगाजल या किसी भी पवित्र नदी के जल की कुछ बून्द पानी में डालकर नहाने से भी तीर्थ संन्ना करने जितना पुण्य मिलता है। 

माघ स्नान का महत्व 

ज्योतिष के अनुसार माघ मास का बेहद जरुरी है।इस महीने में स्नान करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते है और सभी पापो से मुक्ति मिलती है। इसी महीने में स्नान करने से हजारो अश्वमेघ यझ कराने के बराबर पुण्य फल मिलता है।वह प्रयाजराज के संगम में माघ मास के दौरान स्नानं करने से कभी भी न खत्म होने वाला पुण्य मिलता है। also read : आज पूर्णिमा के विशेष दिन सुख समृद्धि के लिए भगवान सत्यनारायण की पूजा करवाते समय इन खास बातों का रखे ध्यान

सुख सौभाग्य और मोक्ष देने वाला महीना 

हिन्दू धर्म में ज्योतीष के अनुसार माघ मास में हर दिन प्रयाग संगम पर नहाने से सुख सौभाग्य,धन और संतान प्राप्ति होती है और मृत्यु के बाद मोक्ष भी मिल जाता है।भगवान विष्णु का धाम मिलता है।पुरे माघ महीने में प्रयागराज के संगम में नहाने से कई याझो को कराने का जितना पुण्य भी मिलता है।साथ ही सोना,भूमि और गोदान करने का पुण्य भी माघ मास में तीर्थ स्नान करने से मिलता है।