मंदिर में मूर्तियों का स्पर्श वर्जित है क्यों

 
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 मंदिर में प्रवेश करते समय कुछ नियमों का पालन जरूर करें। सिर ढककर मंदिर में प्रवेश करना, नंगे पैर मंदिर जाना, मंदिर प्रवेश के समय सीढ़ियों का स्पर्श करना और एक सबसे अहम् बात मंदिर प्रवेश के बाद वहां स्थापित मूर्तियों को स्पर्श न करना।

 ज्योतिष कारण

आचार्य अनिल चंद्र डौर्बी पराशर जी ने बतया की  मंदिर की हर एक मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की जाती है और उसके बाद ही उसकी पूजा का विधान है। मंदिर प्रवेश के दौरान एक भक्त अनुष्ठानिक रूप से शुद्ध अवस्था में न हो , इसलिए पुजारी द्वारा मूर्तियों को न छूने का अनुरोध किया जाता है। यदि हम मंदिर के भीतर प्रवेश करने के बाद मूर्तियों का स्पर्श करते हैं तो उनकी पवित्रता कम हो सकती है।  हिंदू धर्म में कोई भी कर्मकांड करने से पूर्व शुद्धता को अत्यधिक माना जाता है।मंदिर में पूजन के लिए तन और मन दोनों का पवित्र होना आवश्यक होता है। ऐसे में शुद्ध तन और मन के साथ यदि हम मंदिर में प्रवेश नहीं करते हैं तो मंदिर के नियमों के अनुसार मूर्तियों का स्पर्श न करना ही बेहतर होता है।


  
स्त्रियों का मंदिर के गर्भ गृह में प्रवेश वर्जित 

ज्योतिषचार्य अनिल जी का कहना है कि प्रातः काल सभी मूर्तियों का श्रृंगार किया जाता है। ऐसे में यदि आप उनका स्पर्श करते हैं तो उनका श्रृंगार बिगड़ सकता है। इसी वजह से मंदिर के भीतर मूर्तियों को छूने की मनाही होती है। मंदिर में कुछ स्थानों को गर्भगृह के रूप में देखा जाता है और उस स्थान पर सिर्फ पुजारी को ही प्रवेश की अनुमति होती है। मूर्तियां अक्सर गर्भ गृह के भीतर ही स्थापित होती हैं इसलिए उन्हें कोई आम भक्त स्पर्श नहीं कर सकता है। यही वजह है कि मूर्तियां का प्रवेश नहीं करना चाहिए। मंदिर में मूर्तियों को स्पर्श करना भले ही वर्जित क्यों न हो लेकिन आप शिवलिंग को एक निश्चित समय अनुसार स्पर्श कर सकते हैं। शिवलिंग के स्नान और श्रृंगार का समय प्रातः 6 से 11 बजे तक माना जाता है और इस समय में ही शिवलिंग को स्पर्श किया जाता है। 

 मंदिर में प्रवेश करते हैं तो उसके नियमों का पालन बहुत जरूरी होता है। मुख्य रूप से प्रवेश के बाद मूर्तियों का स्पर्श न करना मंदिर की पवित्रता बनाए रखने के लिए बहुत जरूरी माना जाता है।