allahabad high court decision :कर्मचारियों के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट (allahabad high court) का बड़ा फैसला आया है। फैसले के अनुसार इंक्रीमेंट का लाभ इन कर्मचारियों को नहीं मिलेगा। इस फैसले से उक्त कर्मचारियों को झटका भी लगा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले ने अपने फैसले में सब क्लीयर कर दिया है।
कर्मचारियों और सरकार के बीच अक्सर टकराव की स्थिति आ जाती है। आपने कर्मचारियों को अपनी मांगों को लेकर धरने प्रदर्शन करते भी देखा होगा।
कर्मचारियों के लिए धरने प्रदर्शन करने पर कई बार मांग पूरी हो जाती है, परंतु कई बार मांगें कोर्टों तक पहुंच जाती है। ऐसे मामलों में कोर्टों के फैसले निर्णायक होते हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट (allahabad high court) से भी कर्मचारियों के इंक्रीमेंट संबंधित फैसला आया है।
पहले सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों को नहीं मिलेगा लाभ
इलाहाबाद हाईकोर्ट (allahabad high court) की ओ से बोला गया कि 30 जून को जो सेवानिवृत्त हुए सरकारी कर्मचारी है, उनको जुलाई माह का एक इंक्रीमेंट का लाभ 1 मई 2023 के बाद वालों को ही मिलेगा।
इससे पूर्व हुए रिटायर कर्मचारियों (retired employees) को एरियर के साथ कोई लाभ नहीं दिया जाएगा। फैसला न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र और न्यायमूर्ति दोनाडी रमेश की खंडपीठ की ओर से दिया गया। यह फैसला उत्तर प्रदेश सरकार (UP Govt) की विशेष अपील पर आया है।
क्या मामला पहुंचा हाईकोर्ट
हाईकोर्ट (High Court Decision) में एक मामला पहुंचा। इसके अनुसार 30 जून को अलग अलग सालों में रिटायर हुए कर्मचारियों को 1 जुलाई का एक इंक्रीमेंट का लाभ उनकी सेवानिवृत्ति (Retired employees) वर्ष से जोड़ कर एरियर संग दिया जाना चाहिए या सुप्रीम कोर्ट का इस संबंध में दिए निर्णय की तिथि से भुगतान किया जाएगा।
इसमें हाईकोर्ट की ओर से फैसला दिया गया है वह सेवानिवृत्त कर्मचारी (retired employee) ही एक इंक्रीमेंट का लाभ का हकदार है, जो सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद रिटायर हुआ है।
सरकार की ओर इन्होंने रखा पक्ष
मामले में सरकार की तरफ से महाधिवक्ता एमसी चतुर्वेदी और अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता रामानंद पांडेय की तरफ से पक्ष रखा गया। दलील दी गई कि हाईकोर्ट की एकलपीठ की ओर से 2015 से लेकर 2024 के दौरान 30 जून को सेवानिवृत्त कर्मचारियों को एक इंक्रीमेंट बकाया सहित भुगतान करने का आदेश दिया गया।
उन्होंने कहा कि हय सुप्रीम कोर्ट की मंशा से उल्ट है। इस वजह से भारी संख्या में पुराने वर्षों की याचिकाएं दाखिल हो रही है। परंतु, आदेश का लाभ उनको ही दिया जाएगा जो सुप्रीम कोर्ट के फैसले में दर्ज तिथि के बाद सेवानिवृत्त हुए हैं।
कब का है आदेश
बता दें कि हाईकोर्ट (allahabad high court) का यह मूल आदेश 11 अप्रैल 2023 का है। इस पर सरकार की ओर से पुनर्विलोकन अर्जी दी गई है। इसको डिसाइड करते हुए सुप्रीम कोर्ट की ओर से साफ किया गया कि फैसले की तिथि के बाद के कर्मचारियों को ही फैसले का लाभ मिलेगा।
सुप्रीम कोर्ट की ओर से 1 मई 2023 की कटऑफ डेट तय की गई है। इसलिए एकलपीठ के आदेश से सभी याचियों को इंक्रीमेंट पाने का अधिकार नहीं मिलता है।
इन की तरफ से लगाई की थी याचिका
उत्तर प्रदेश (UP Employees Salary Hike) में पुलिस होमगार्ड विभाग से रिटायर कर्मचारियों की याचियों में सतीष चंद्र सिंह और 10 अन्य की ओर से तर्क रखे गए। उन्होंने कहा कि इंक्रीमेंट से संबंधित सरकारी आदेश जारी होने की तिथि से प्रभावी होते हैं। परंतु, लेकिन कोर्ट के आदेश भूतलक्षी प्रभाव रखते भी रखते हैं।
उन्होंने कोर्ट के आदेश का खुद पर भी लाभ होने का दावा किया। परंतु, हाईकोर्ट की ओर से दोनों पक्षों को सुना गया और फैसला दिया गया कि सुप्रीम कोर्ट की कटआफ डेट प्रभावी ही होगी। उससे पूर्व में रिटायर कर्मचारियों को इसका लाभ नहीं मिल सकता है।