मथुरा: श्री ठाकुर बांके बिहारी मंदिर का 54 साल पुराना तहखाना फिर से चर्चा में है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित हाई पावर्ड कमेटी के आदेश के बाद शनिवार को मंदिर का खजाना खोला गया, लेकिन नतीजा उम्मीदों के विपरीत रहा। वहां से न तो कोई बहुमूल्य वस्तु मिली और न ही पुराने समय के कीमती आभूषण या धातु के सामान का कोई सुराग। इस बीच, कमेटी के सदस्य दिनेश गोस्वामी ने कई गंभीर सवाल उठाए हैं — आखिर वह खजाना कहां गायब हो गया, जिसकी चर्चा वर्षों से होती रही है?
खजाना खुला, लेकिन सवाल और गहरे हो गए
रविवार सुबह मंदिर के तहखाने को दूसरे दिन भी खोला गया। पहले दिन जब ताला टूटा था, तो वहां कुछ बर्तन, लकड़ी का सिंहासन और पुराने संदूक मिले थे, जिनमें से कई खाली निकले। यह देखकर मौजूद लोगों में निराशा फैल गई। गोस्वामी समाज ने इस कार्रवाई का विरोध भी किया, जबकि प्रशासनिक टीम ने आगे की जांच के लिए तहखाना दोबारा बंद कर दिया।
कमेटी सदस्य दिनेश गोस्वामी ने कहा,
“खजाना तो खुल गया, लेकिन यह रहस्य जरूर छोड़ गया कि सारी चीजें आखिर कहां गायब हो गईं। संदूकों में सिर्फ खाली डिब्बे हैं और मूल्यवान वस्तुएं नदारद हैं — यह बेहद गंभीर मामला है।”
उन्होंने इस पर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है और बताया कि अगली बैठक में वे इस विषय को प्रमुखता से उठाएंगे ताकि सच्चाई सामने आ सके।
54 साल बाद फिर खुला था तहखाना
मंदिर के इस तहखाने को अंतिम बार 1971 में खोला गया था। उस समय वहां से मिले कीमती सामान को भारतीय स्टेट बैंक के लाकर में सुरक्षित रखा गया था। इस बार जब 54 साल बाद तहखाना खोला गया, तो चार लोहे के संदूक और एक लकड़ी का बॉक्स बरामद हुए। इनमें से दो संदूक खोले गए, लेकिन उनमें केवल पुराने बर्तन और एक छोटा चांदी का छत्र ही मिला। लकड़ी के संदूक में ज्वैलरी के खाली डिब्बे पाए गए।
मौके पर रही भारी भीड़
शनिवार को जब तहखाना खोला गया, तो मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, गोस्वामी समाज के सदस्य और पुलिसबल मौजूद थे। भारी सुरक्षा के बीच लगभग चार घंटे तक चली यह प्रक्रिया रहस्य और निराशा दोनों छोड़ गई।
अब आगे क्या?
हाई पावर्ड कमेटी अब इस बात की जांच करेगी कि 1971 के बाद से अब तक खजाने की स्थिति में इतना बड़ा बदलाव कैसे आया। कई लोगों का मानना है कि या तो वस्तुएं किसी समय शिफ्ट की गईं या फिर उचित रिकॉर्ड न होने के कारण उनका हिसाब नहीं रखा जा सका।
फिलहाल, मथुरा के इस ऐतिहासिक मंदिर का रहस्यमय खजाना अब एक पहेली बन चुका है — जो खुलने के बाद भी कई सवाल अधूरे छोड़ गया है।
