Budget – Budget 2026 के पहले निवेशक और ज्वैलर्स सबकी नजर सोना-चांदी पर लगी है। पिछले पांच सालों के इतिहास से यह साफ होता है कि सरकार के फैसले कीमतों को तेजी या गिरावट की दिशा दे सकते हैं। कभी ड्यूटी घटती है तो लीगल इंपोर्ट (legal import) बढ़ता है, तो कभी बढ़ने से मांग घटती और कीमतें बढ़ती हैं… आइए नीचे खबर में डाल लेते है एक नजर-
हर साल बजट से पहले सोने और चांदी के बाजार में अलग ही बेचैनी देखने को मिलती है। ज्वैलर्स (Jewelers) अपने स्टोर पर हिसाब-किताब लगाते हैं, निवेशक चार्ट और डेटा (data) पर नजर डालते हैं, और आम लोग बस यही सोचते हैं कि इस बार सोना सस्ता होगा या उनकी शादी और त्योहारों का बजट प्रभावित होगा।
भारत में सोना और चांदी सिर्फ गहनों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये बचत, भरोसे और परंपरा का भी अहम हिस्सा हैं। हालांकि, इनकी कीमत केवल अंतरराष्ट्रीय रेट (international rate) पर निर्भर नहीं करती। सरकार के किसी फैसले, एक लाइन की घोषणा या कस्टम ड्यूटी में छोटे से बदलाव से भी कीमतों में तेजी या गिरावट आ सकती है।
Budget 2026 से पहले यह समझना जरूरी है कि पिछले पांच वर्षों में सरकार ने सोने और चांदी पर कौन-कौन से फैसले लिए (What decisions did the government take on gold and silver?) और उन फैसलों ने बाजार की दिशा और कीमतों को कैसे प्रभावित किया।
देश में इतने संवेदनशील क्यों हैं सोना और चांदी –
भारत अपनी ज़रूरत का अधिकतर सोना और चांदी विदेश से आयात करता है। जब इंपोर्ट पर टैक्स (tax) बढ़ता है, तो इसका असर सीधे कीमतों पर पड़ता है, जिससे आम लोगों की जेब भी प्रभावित होती है।
सरकार के सामने हमेशा दो लक्ष्य रहते हैं: एक, तस्करी रोकना और दूसरा, व्यापार घाटे को नियंत्रित (control trade deficit) रखना। इन दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना हर बजट की सबसे बड़ी चुनौती होती है।
2021 का बजट: बाजार में राहत-
2021 के बजट में सरकार ने सोने और चांदी पर बेसिक कस्टम ड्यूटी 12.5% से घटाकर 7.5% कर दी। उस समय तस्करी बढ़ रही थी और सोना आम लोगों की पहुंच से बाहर होता जा रहा था। ड्यूटी कम होते ही बाजार में तेजी (Market booms as duty is reduced) देखी गई, ज्वैलरी की मांग बढ़ी और लीगल इंपोर्ट में सुधार हुआ।
2022 का बजट: चुप्पी के बाद बीच साल में झटका-
2022 के बजट में सोने और चांदी पर कोई बदलाव नहीं किया गया, जिससे बाजार को लगा कि अब स्थिरता रहेगी। लेकिन जुलाई 2022 में सरकार ने अचानक सोने पर बेसिक कस्टम ड्यूटी (Basic Custom Duty) फिर से 12.5% कर दी। इसका मुख्य कारण बढ़ता ट्रेड डेफिसिट था। इस फैसले के बाद सोना महंगा हुआ, मांग कम हुई और बाजार में फिर अनिश्चितता फैल गई। यही साल था जब लोगों ने समझा कि बजट के बाहर भी बड़े फैसले आ सकते हैं।
2023 का बजट: चांदी पर असर-
2023 के बजट में सरकार ने चांदी पर बड़ा कदम उठाया। बेसिक कस्टम ड्यूटी 7.5% से बढ़ाकर 10% कर दी गई और साथ ही AIDC भी बढ़ाया गया, जिससे कुल ड्यूटी करीब 15% तक पहुंच गई। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने बताया कि इसका उद्देश्य चांदी को सोने और प्लैटिनम के बराबर लाना है। इस फैसले से चांदी की कीमतों में तेजी आई और इंडस्ट्रियल यूज़र्स के लिए लागत बढ़ गई।
2024 का बजट: गेम चेंजर फैसला-
2024 का बजट सोने और चांदी के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। सरकार ने सोना, चांदी और प्लैटिनम पर कुल कस्टम ड्यूटी घटाकर 6% कर दी। सोने पर कुल टैक्स 15% से सीधे 6% पर आ गया, जबकि सिल्वर और प्लैटिनम पर भी इसी तरह कटौती की गई। इसका उद्देश्य स्मगलिंग पर रोक लगाना और घरेलू ज्वेलरी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा (Promotion of domestic jewellery manufacturing) देना था। इस फैसले के बाद लीगल इंपोर्ट बढ़ा (Legal imports increased) और बाजार में कुछ राहत दिखी, हालांकि अंतरराष्ट्रीय रेट के कारण कीमतें पूरी तरह नीचे नहीं आईं।
2025 का बजट: सोने-चांदी में स्थिरता का संकेत-
2025 के बजट में सोना और चांदी की कस्टम ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया गया। 5% BCD और 1% AIDC मिलाकर कुल 6% ड्यूटी बरकरार रखी गई। हालांकि, सरकार ने नए टैरिफ लाइन पेश किए, जिससे भविष्य में टैक्स स्ट्रक्चर बदलने की संभावना बनी रही। ज्वैलरी और कुछ प्लैटिनम प्रोडक्ट्स पर ड्यूटी में कटौती (Duty cut on platinum products) से रिटेल सेक्टर को राहत जरूर मिली।
पिछले 5 सालों का सोने-चांदी पर असर-
पिछले पांच सालों को देखें तो एक बात साफ दिखती है। जब ड्यूटी बढ़ाई गई, तो स्मगलिंग (smuggling) बढ़ी और मांग घट गई, जबकि ड्यूटी कम होने पर लीगल इंपोर्ट (legal import) और पारदर्शिता बढ़ी। 2024 के बाद से सरकार ने संकेत दिया है कि अब बाजार में ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं होगा। यही वजह है कि Budget 2026 से पहले निवेशक और बाजार नीति में निरंतरता की उम्मीद कर रहे हैं।
Budget 2026 से क्या उम्मीदें-
इंडस्ट्री (Industy) चाहती है कि सरकार 6% ड्यूटी को बनाए रखे या केवल सीमित बदलाव करे। इससे कीमतों में स्थिरता बनी रहेगी और उपभोक्ताओं का भरोसा कायम रहेगा। अगर सरकार यह संतुलन बनाए रखती है, तो सोना और चांदी दोनों निवेश और उपभोग के लिहाज से मजबूत बने रह सकते हैं।
Conclusion-
पिछले पांच बजट यह साफ संदेश देते हैं कि सोने और चांदी की कीमतें केवल बाजार के रुझानों से नहीं, बल्कि सरकारी नीतियों (government policies) से भी तय होती हैं। एक सही फैसला पूरे सेक्टर को राहत दे सकता है, जबकि गलत समय पर लिया गया निर्णय कीमतों में अस्थिरता ला सकता है। Budget 2026 से पहले सरकार के सामने वही पुरानी चुनौती है-संतुलन बनाए रखना।
