DA Hike : लंबे समय से केंद्र सरकार के कर्मचारी और पेंशनभोगी महंगाई भत्ता (DA/DR) बढ़ोतरी का इंतजार कर रहे है। इस बीच यह देखने की बात है कि यह दर 60% के पार जाएगी या नहीं। ताजा आंकड़े और रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बढ़ोतरी की दिशा का बड़ा अपडेट सामने आया है… जिसे जान लेना कर्मचारियों के लिए बेहद जरूरी हैं-
केंद्र सरकार ने पिछली बार अपने कर्मचारियों और पेंशनरों के महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) में 3% की बढ़ोतरी की थी, जिसके बाद जुलाई 2025 से यह दर 58% हो गई थी। अब 1 जनवरी 2026 से डीए/डीआर में फिर बढ़ोतरी होनी है। फिलहाल AICPI-IW (औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक) के ताजा आंकड़े डीए में 2 से 3 फीसदी की वृद्धि के संकेत दे रहे हैं।
जुलाई 2025 में AICPI-IW सूचकांक 146.5 पर था, जो नवंबर तक बढ़कर 148.2 पहुंच गया है, जबकि दिसंबर की रिपोर्ट अभी आनी बाकी है। दूसरी ओर, दिसंबर में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 1.33% हो गई, जो नवंबर में 0.71% थी। इन आंकड़ों को देखते हुए माना जा रहा है कि अगली बढ़ोतरी के बाद डीए/डीआर की दर 60% के पार जा सकती है।
बता दें कि मार्च 2025 में अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (औद्योगिक श्रमिक) 140.1 पर रहा था। अप्रैल में सूचकांक 140.6 रहा तो मई 2025 में 144.0 था। उसके बाद जून 2025 में यह सूचकांक 145.0 पर रहा था। जुलाई में 146.5, अगस्त 2025 में 147.1, सितंबर 2025 में 147.3, अक्टूबर 2025 147.7 और नवंबर 2025 में अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (औद्योगिक श्रमिक) 148.2 रहा है। अभी दिसंबर 2025 की रिपोर्ट आना बाकी है।
महंगाई दर बढ़कर 1.44% पर पहुंची-
रसोई के जरूरी सामान, खासकर सब्जियों और प्रोटीन युक्त खाद्य वस्तुओं के दाम (Prices of protein-rich food items) बढ़ने से दिसंबर 2025 में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर तीन महीने के उच्च स्तर 1.33% पर पहुंच गई। नवंबर में यह दर 0.71% थी, यानी एक महीने में तेज उछाल दर्ज किया गया। इससे पहले सितंबर में महंगाई दर 1.44% के स्तर पर थी, जो हाल के महीनों में सबसे ज्यादा रही है।
अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI-IW) के आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि डीए और डीआर की दर 60% के स्तर को पार कर सकती है। नवंबर के सूचकांक में देश के कई औद्योगिक केंद्रों में बढ़ती महंगाई दर्ज (Rising inflation recorded in industrial centers) की गई है, जिससे अगली डीए बढ़ोतरी की संभावना और मजबूत हो गई है।
श्रम और रोजगार मंत्रालय (Ministry of Labor and Employment) के अंतर्गत काम करने वाला श्रम ब्यूरो हर महीने देश के 88 औद्योगिक रूप से महत्वपूर्ण केंद्रों में फैले 317 बाजारों से एकत्रित खुदरा मूल्यों के आधार पर औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-IW) तैयार करता है। नवंबर 2025 में अखिल भारतीय CPI-IW में 0.5 अंक की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 148.2 पर पहुंच गया। वहीं, नवंबर 2025 में वार्षिक मुद्रास्फीति दर 2.56% रही, जबकि नवंबर 2024 में यह दर 3.88% थी।
जब डीए/डीआर की दर 50% के पार हो जाती है, तो नियम के अनुसार इसे मूल वेतन और पेंशन में विलय कर दिया जाना चाहिए। हालांकि, वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी (Minister of State for Finance Pankaj Chaudhary) ने संसद में स्पष्ट किया कि सरकार ऐसा कोई विलय नहीं करेगी। इस पर नेशनल मिशन फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल का कहना है कि यह स्थिति काफी दुर्भाग्यपूर्ण है, क्योंकि सरकार पहले ही कर्मचारियों की सैलरी (employees salary) का लगभग 10% हर माह बचा चुकी है।
इसे इस तरह भी देखा जा सकता है कि पिछले दो सालों से कर्मचारियों का लगभग 10% वेतन काट लिया जा रहा है और पेंशन में भी यही कटौती जारी है। वहीं, आठवें वेतन आयोग (8th pay commission news) के लागू होने की संभावना भी अभी दो साल बाद ही है। ऐसे में कर्मचारियों को लगभग चार साल तक हर माह 10% वेतन का नुकसान उठाना पड़ेगा। अब सरकार कह रही है कि डीए को मूल वेतन में मर्ज नहीं किया जाएगा। बतौर पटेल, सरकार, कर्मचारी को उसका आर्थिक फायदा देने से क्यों कतरा रही है।
‘डीए/डीआर’ की गणना के कैलकुलेटर को बदलने की मांग-
कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स (Confederation of Central Government Employees and Workers) के महासचिव एसबी यादव ने पिछले साल संसद के बजट सत्र से पहले कैबिनेट सचिव को एक पत्र भेजा था। इस पत्र में उन्होंने महंगाई भत्ता/महंगाई राहत (डीए/डीआर) की गणना का कैलकुलेटर बदलने की मांग की थी। उनका सुझाव था कि डीए की दर तय करने के लिए 12 महीने के औसत की बजाय तीन महीने के औसत का उपयोग किया जाए।
मतलब, परिवर्तनीय डीए दिया जाए। इससे केंद्र सरकार के कर्मचारियों (Central government employees) को हर तीन महीने में वास्तविक मूल्य वृद्धि से मुआवजा मिल सकेगा। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कर्मचारियों का डीए इसी आधार पर तय होता है। इतना ही नहीं, केंद्रीय कर्मियों और पेंशनरों (pensioners) के लिए अलग से ‘उपभोक्ता मूल्य सूचकांक’ तैयार करने की मांग की गई है।
यादव के अनुसार, बैंकिंग कर्मचारियों (banking employees) का डीए हर साल प्रत्येक तिमाही (फरवरी-अप्रैल, मई-जुलाई, अगस्त-अक्टूबर और नवंबर-जनवरी) में संशोधित किया जाता है। अगर जनवरी में मूल्य वृद्धि होती है, तो इसकी आंशिक भरपाई 12 महीने बाद की जाती है। उनका सुझाव है कि डीए की गणना (DA calculation) और भुगतान हर छह महीने के बजाय हर तीन महीने में किया जाए और इसे पॉइंट टू पॉइंट आधार पर सीधे दिया जाए। इसके अलावा, वर्तमान में डीए को न्यूनतम मूल्य पर राउंड ऑफ (DA rounded off to the lowest value) किया जाता है।
जैसे अगर किसी कर्मचारी के लिए 42.90% डीए तय है, तो उन्हें केवल 42% डीए ही दिया जाता है। इस तरह 0.9% डीए से केंद्रीय कर्मचारियों को छह महीने तक वंचित रखा जाता है। यादव का कहना है कि केंद्र सरकार (central government) के कर्मचारियों को पॉइंट-टू-पॉइंट डीए प्रदान किया जाना चाहिए, जैसा कि बैंकों और LIC के कर्मचारियों को मिलता है। साथ ही, कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए अलग उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Separate Consumer Price Index for Pensioners) तैयार करने की भी मांग की गई है।
