DA Hike July 2025 : केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स को दिवाली से पहले एक बड़ा तोहफा मिल सकता है। उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार जल्द ही महंगाई भत्ते (DA) की घोषणा करेगी। जनवरी 2025 में सरकार ने डीए में सिर्फ़ 2% की बढ़ोतरी की थी। हालांकि इस बार DA में कुछ ज्यादा बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही है-
केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स को दिवाली से पहले एक बड़ा तोहफा मिल सकता है। उम्मीद है कि सरकार जल्द ही महंगाई भत्ते (DA) की घोषणा करेगी। रिपोर्ट्स के अनुसार, DA में 3% की बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे यह मौजूदा 55% से बढ़कर 58% हो जाएगा।
महंगाई भत्ता (DA) का निर्धारण प्रत्येक छह महीने में किया जाता है, जो 12 महीनों की महंगाई दर पर आधारित होता है। इसके लिए एक विशेष फॉर्मूले का उपयोग किया जाता है। हाल ही में, श्रम ब्यूरो के अनुसार, जून 2025 के लिए औद्योगिक श्रमिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-IW) 1 अंक बढ़कर 145 हो गया है। इससे पहले, जनवरी 2025 में, सरकार ने डीए में केवल 2% की वृद्धि की थी, जिससे यह 53% से बढ़कर 55% हो गया था, जिसने केंद्रीय कर्मचारियों को निराश किया था।
3 प्रतिशत बढ़ सकता है DA-
श्रम ब्यूरो (Labour Bureau) द्वारा जारी जून 2025 के CPI-IW इंडेक्स के अनुसार, यह 145 पर पहुँच गया है। इसके चलते जुलाई 2024 से जून 2025 तक के 12 महीनों का औसत इंडेक्स 143.6 रहा। इन आंकड़ों के आधार पर, महंगाई भत्ते (DA) में 3% की वृद्धि की उम्मीद की जा रही है, जिससे देश के 1 करोड़ से अधिक कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को लाभ होगा। इस बढ़ोतरी की आधिकारिक घोषणा दीपावली के आसपास, यानी अक्टूबर या नवंबर में होने की संभावना है।
कर्मचारियों और पेंशनर्स पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी का सीधा असर केंद्रीय कर्मचारियों (central employees) की सैलरी (salary) और पेंशनर्स (pensioners) की पेंशन पर पड़ता है। उदाहरण के लिए, अगर किसी कर्मचारी का मूल वेतन 40,000 रुपये है और DA 55 फीसदी से बढ़कर 58 फीसदी हो जाता है, तो उनकी मासिक DA राशि 22,000 रुपये से बढ़कर 23,200 रुपये हो जाएगी।
यानी हर महीने 1,200 रुपये की सैलरी बढ़ोतरी से कर्मचारियों को बड़ा फायदा होगा। DA की इस वृद्धि से TA और HRA जैसे अन्य भत्ते भी बढ़ेंगे, जिससे उनकी कुल आय में और इजाफा होगा। यह बढ़ोतरी इसलिए भी खास है क्योंकि जनवरी-जून 2025 में DA में केवल 2% की वृद्धि हुई थी, जो पिछले सात सालों में सबसे कम थी।
