DA Hike Update : केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) को लेकर नया अपडेट सामने आया है। ताजा आंकड़ों के आधार पर अगली बढ़ोतरी को लेकर चर्चाएं तेज हैं। माना जा रहा है कि मार्च में होने वाली समीक्षा के बाद DA में फिर इजाफा किया जा सकता है, जिससे लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स को सीधा फायदा मिलेगा… इस अपडेट से जुड़ी पूरी डिटेल जानने के लिए इस खबर काे पूरा पढ़ लें-
महंगाई भत्ता (DA) सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स (pensioners update) को बढ़ती महंगाई के असर से राहत देने के लिए दिया जाता है, लेकिन सातवें वेतन आयोग के दौरान इसकी बढ़ोतरी की रफ्तार अब तक सबसे धीमी रही है। यह स्थिति 5वें और 6वें वेतन आयोग के मुकाबले काफी अलग मानी जा रही है।
जानकारों के मुताबिक DA में अभी हो रही धीमी बढ़ोतरी आगे चलकर आठवें वेतन आयोग के तहत मिलने वाली सैलरी बढ़ोतरी को ज्यादा प्रभावी बना सकती है। अहम बात यह है कि नया वेतन आयोग लागू होते ही महंगाई भत्ता (DA) और पेंशनर्स को मिलने वाला महंगाई राहत (DR) शून्य यानी 0% पर रीसेट कर दिया जाता है।
क्या रहा है पिछला पैटर्न-
अगर पुराने आंकड़ों पर नजर डालें तो 6वें वेतन आयोग (2006-2016) के दौरान DA बढ़कर बेसिक सैलरी (employees basic salary) के करीब 125% तक पहुंच गया था। वहीं 5वें वेतन आयोग (1996-2006) में यह करीब 74% तक गया था। इसके मुकाबले 7वें वेतन आयोग में अभी DA 58% है और मार्च में होने वाली अगली समीक्षा के बाद इसके लगभग 60% तक पहुंचने की संभावना है। DA में हर साल दो बार संशोधन होता है, जो जनवरी और जुलाई से लागू माना जाता है, जबकि घोषणा आमतौर पर मार्च और अक्टूबर में की जाती है।
सरकार ने नवंबर 2025 में आठवें वेतन आयोग (8th pay commission latest updates) का गठन किया है और इसे रिपोर्ट देने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। ऐसे में माना जा रहा है कि इसकी सिफारिशें मिड-2027 से पहले नहीं आएंगी। तब तक DA में कम से कम तीन बार बढ़ोतरी हो सकती है-मार्च और अक्टूबर 2026 में तथा मार्च 2027 में। यदि हर बार औसतन 2 से 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है, तो नया वेतन आयोग (new pay commission) लागू होने से पहले DA करीब 70% तक पहुंच सकता है।
सातवें वेतन आयोग (7th pay commission news) में DA की रफ्तार धीमी रहने की एक बड़ी वजह कोविड काल के दौरान करीब 18 महीनों तक DA/DR बढ़ोतरी पर लगी रोक भी मानी जाती है, जिससे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
