किसान भाइयों के लिए सरसों की फसल की बिजाई का समय जल्द ही आने वाला है,लेकिन बुबाई से पहले ही डीएपी (डाइअमोनियम फॉस्फेट) खाद की मांग बढ़ने लगी है। किसान पहले से ही डीएपी स्टॉक करने के लिए बाजारों में भागदौड़ कर रहे हैं क्योंकि उन्हें बिजाई के दौरान खाद की कमी की आशंका है। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को डीएपी के बजाय एसएसपी (सिंगल सुपर फॉस्फेट) के उपयोग की सलाह दी है।
डीएपी की लोकप्रियता किसानों में इसके उच्च फॉस्फोरस और नाइट्रोजन सामग्री के कारण है, जो पौधों की जड़ों और पत्तियों की वृद्धि को तेजी से बढ़ावा देती है। इसका उपयोग करना आसान होता है, और यह मिट्टी में जल्दी घुलकर पौधों को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करता है। डीएपी सभी प्रकार की फसलों के लिए उपयुक्त है, जिससे इसे व्यापक रूप से अपनाया गया है।, लेकिन कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि डीएपी में सल्फर की कमी होती है, जो फसल की गुणवत्ता और पैदावार को प्रभावित कर सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस दौरान डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) के बजाय एसएसपी (सिंगल सुपर फास्फेट) का इस्तेमाल अधिक फायदेमंद हो सकता है। क्योंकि इसमें लगभग 12% सल्फर होता है, जो तैलीय फसलों जैसे सरसों के लिए बहुत जरूरी है। सल्फर की कमी से फसल की गुणवत्ता कम हो सकती है और उत्पादन घट सकता है। कृषि विभाग ने सुझाव दिया है कि एसएसपी के उपयोग से न केवल फसल की पैदावार में सुधार होगा | बल्कि इसके दानों की गुणवत्ता और तेल की मात्रा भी बढ़ाता है।
कृषि विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि अत्यधिक रासायनिक खादों के उपयोग से भूमि की उर्वरता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसके अलावा, ज्यादा खाद डालने से किसानों का आर्थिक नुकसान भी हो सकता है। इसलिए, किसानों को खाद का उपयोग संतुलित रूप से करना चाहिए।
उर्वरकों का उचित मिश्रण
सरसों की अच्छी पैदावार के लिए खेत की तैयारी और सही उर्वरक का प्रयोग अत्यंत आवश्यक है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, बुवाई से पहले अंतिम जुताई के समय 60 कुंतल गोबर की सड़ी हुई खाद खेत में मिला देनी चाहिए। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और फसल को आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं।
कृषि विशेषज्ञ के अनुसार, सरसों की बिजाई के समय प्रति एकड़ 75 किलोग्राम एसएसपी, 35 किलोग्राम यूरिया, 14 किलोग्राम पोटाश (एमओपी), और 10 किलोग्राम जिंक सल्फेट का उपयोग किया जा सकता है। इसके अलावा एक बैग एनपीके (12:32:16) के , साथ ही दो बैग जिप्सम के , 15-20 किलो यूरिया और 10 किलो जिंक सल्फेट का मिश्रण बना के डाले तो ये लाभकारी हो सकता है।
सरसों की बिजाई का समय
सरसों की बिजाई के लिए आदर्श समय 15 अक्टूबर से 25 अक्टूबर तक माना जाता है, हालांकि कुछ किसान इससे पहले भी बिजाई शुरू कर देते हैं। बिजाई का समय मुख्य रूप से मानसून की बारिश पर निर्भर करता है। अगर बारिश अच्छी होती है, तो सरसों की खेती का क्षेत्रफल बढ़ जाता है, जबकि कम बारिश होने पर यह घट सकता है।
हालांकि खाद की उपलब्धता अभी तक सही है, फिर भी किसान इस चिंता में हैं कि कहीं बिजाई के समय खाद की कमी न हो जाए। इसी कारण वे खाद पहले से ही जमा करने का प्रयास कर रहे हैं। कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे खाद का चयन सोच-समझकर करें और अकारण चिंता न करें। इसके अलावा, किसानों को अपनी मिट्टी की जांच करानी चाहिए और संतुलित खाद का उपयोग करना चाहिए ताकि फसल की पैदावार और गुणवत्ता दोनों बेहतर हो सकें।
खेत की तैयारी
सरसों की बिजाई के लिए खेत की तैयारी भी महत्वपूर्ण है। पिछली फसलों की कटाई और जुताई समय पर पूरी होनी चाहिए। अगर जमीन में पर्याप्त नमी है, तो पलेवा करना भी जरूरी हो सकता है। इस तरह की प्रक्रियाओं से बिजाई का समय सही ढंग से निर्धारित किया जा सकता है।
किसानों के लिए यह आवश्यक है कि वे सही उर्वरकों का उपयोग करें और खेत की पूरी तैयारी के बाद ही बिजाई करें। अगर किसान संतुलित खाद और सही समय पर तकनीकी सुझावों का पालन करते हैं, तो वे न केवल अपनी पैदावार बढ़ा सकते हैं बल्कि अपनी फसलों की गुणवत्ता में भी सुधार कर सकते हैं।