Property Rights : समाज में बेटे और बेटी के बीच कोई फर्क नहीं किया जाता है। उन्हें समान नजरों से देखा जाता है। लेकिन जब बात प्रॉपर्टी की आती है तो यह पैंच फंस जाते हैं। पिता की संपत्ति पर बेटी और बेटे के अधिकार (Daughter’s Property Rights) को लेकर कोर्ट में हजारों केस पेंडिंग है। हाल ही में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बेटी के संपत्ति पर अधिकार को लेकर अहम फैसला सुनाया है जो सभी को जानना चाहिए। आईये नीचे खबर में विस्तार से जानते हैं –
भारतीय कानून में बेटियों को पिता की संपत्ति पर बेटों के बराबर का अधिकार दिए गया है। लेकिन कई बार बेटियों को उनके अधिकार से वंचित रखा जाता है। कई मामलों में देखने को मिला है जिस भी समय पिता की प्रॉपर्टी (Daughter’s Property Rights) का बंटवारा किया जाता है तो बेटियों को उनके परिवार के लोग संपत्ति में बराबर का अधिकार न देते हुए खुद ज्यादा का लालच करते नजर आते हैं। आज कोर्ट में प्रॉपर्टी बंटवारे से जुड़े हजारों मामले पेंडिंग हैं।
कोर्ट ने कर दिया क्लियर –
हाल ही में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पिता की संपत्ति पर बेटी के अधिकार को लेकर एक महत्पूर्वण फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने क्लियर करते हुए कहा कि ज़ुबानी बंटवारे का बहाना बनाकर बेटी को उसके कानूनी हिस्से से पुश्तैनी संपत्ति (Ancestral Property)से वंचित नहीं किया जा सकता है।
जस्टिस बिभू दत्ता गुरु ने आदेश सुनाया और दो निचली अदालतों के फैसले रद्द कर दिया। उन अदालतों ने एक महिला के पिता की संपत्ति पर दावे को यह कहकर खारिज कर दिया था कि वह कानून का गलत इस्तेमाल कर रही है। हाई कोर्ट ने विनीता शर्मा बनाम राकेश शर्मा सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court Decision) के ऐतिहासिक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि बेटियों को भी बराबर के विरासत अधिकार मिलते हैं।
बेटी जन्म से ही संपत्ति में हिस्सेदार
हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 के मुताबिक, बेटी जन्म से ही पिता की संपत्ति में हिस्सेदार होती है और उसे बेटे की तरह ही बराबर के अधिकार (Property Rights) मिलते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि सिर्फ 20 दिसंबर, 2004 से पहले किए गए रजिस्टर्ड डीड (Registered Deed) या कोर्ट के आदेश वाले बंटवारे ही वैध माने जाएंगे। ज़ुबानी बंटवारा या बिना रजिस्ट्रेशन वाला पारिवारिक इंतजाम बेटी के अधिकार को खत्म नहीं कर सकता है।
यह था पूरा मामला –
यह केस राजनांदगांव की अमरिका बाई का था। उन्होंने अपने दिवंगत पिता धनुक लोधी की खेती की जमीन पर अपना अधिकार मांगा। उन्होंने कोर्ट में दावा किया कि उनके पिता की पुश्तैनी संपत्ति (Ancestral Property) में वह क्लास-I वारिस के तौर पर इसकी हकदार है।
कोर्ट ने कह दिया साफ, ज़ुबानी बंटवारा नहीं होगा मान्य –
वहीं दूसरी ओर धनुक लोधी की दूसरी पत्नी और उनके बेटे ने दलील देते हुए कहा कि पहले ही एक ज़ुबानी बंटवारा हो चुका है, जिसमें अमरिका को सिर्फ मेंटेनेंस के लिए एक एकड़ जमीन और घर का हिस्सा दिया गया था। हाई कोर्ट (High Court Decision) ने साफ शब्दों में कहा कि सिर्फ मेंटेनेंस के लिए दिया गया हिस्सा आखिरी बंटवारा नहीं है और ज़ुबानी बंटवारा तब तक मान्य नहीं है जब तक वह किसी पब्लिक डॉक्यूमेंट या कोर्ट के आदेश से साबित न हो। कोर्ट ने आखिर में अमरिका को उनके कानूनी हिस्से का हकदार माना और आदेश दिया कि संपत्ति उसी के अनुसार बांटी जाए। अमरिका का पिता की संपत्ति में जो अधिकार है उसे वह दिया जाए।
