सरकार कर्मचारी भविष्य निधि संगठन और कर्मचारी पेंशन योजना के तहत ग्राहकों के योगदान की सीमा बढ़ाने पर विचार कर रही है ! फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने इस पर विचार करते हुए कहा है !
कि वर्तमान वेतन सीमा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹21,000 की जा सकती है ! तो चलिए जानतें हैं कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने वेतन सीमा पर क्या नया अपडेट दिया हैं ! आइये जानतें हैं इस बारें में विस्तार से जानकारी….
EPFO – मौजूदा अंशदान प्रणाली
वर्तमान में यदि किसी कर्मचारी की मासिक आय ₹15,000 या उससे कम है ! तो उस पर कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के नियम लागू होते हैं ! कर्मचारी और नियोक्ता, दोनों ही उसके वेतन का 12% योगदान करते हैं ! नियोक्ता के योगदान को दो भागों में विभाजित किया जाता है ! 8.33% कर्मचारी पेंशन योजना में जाता है ! और शेष 3.67% भविष्य निधि में जाता है !
उदाहरण के तौर पर, यदि किसी कर्मचारी का वेतन ₹15,000 प्रति माह है ! तो उसके EPF खाते में कर्मचारी का योगदान ₹1,800 होगा ! नियोक्ता का योगदान ₹550.50 होगा ! जबकि कर्मचारी पेंशन योजना के लिए ₹1,249.50 का योगदान दिया जाएगा !
Employees’ Provident Fund Organisation – नई अंशदान सीमा और संभावित प्रभाव
सरकार की योजना के अनुसार, वेतन सीमा को ₹21,000 तक बढ़ाया जा सकता है ! इस बदलाव से कर्मचारियों का कर्मचारी भविष्य निधि में योगदान और पेंशन फंड में निवेश बढ़ जाएगा ! यदि सीमा बढ़ती है, तो कर्मचारी का योगदान ₹2,520 होगा ! नियोक्ता का EPF योगदान ₹770.70 होगा ! कर्मचारी पेंशन योजना में योगदान ₹1,749.30 हो जाएगा !
EPFO ब्याज और बढ़ी हुई आय
यदि एक कर्मचारी 23 वर्ष की उम्र में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन योजना के तहत मासिक ₹15,000 की आय से निवेश शुरू करता है ! और इसे 35 वर्षों तक जारी रखता है ! तो वह कुल ₹71.55 लाख प्राप्त कर सकता है ! जिसमें 8.25% की दर से गणना की गई ₹60.84 लाख की चक्रवृद्धि ब्याज शामिल है !
अगर वेतन सीमा को बढ़ाकर ₹21,000 किया जाता है ! तो संभावित कुल निधि ₹1 करोड़ हो सकती है ! जिसमें ब्याज के रूप में ₹85 लाख शामिल होंगे ! इस प्रकार, वेतन वृद्धि के साथ कर्मचारी अतिरिक्त ₹28.45 लाख कमा सकता है !
Employees’ Provident Fund Organisation – निकासी सीमा में वृद्धि
निकासी सीमा भी बढ़ाकर ₹1 लाख कर दी गई है ! जो कि पहले ₹50,000 थी ! यह सीमा विशेष रूप से पारिवारिक आपात स्थिति के दौरान सहूलियत प्रदान करने के लिए बढ़ाई गई है ! जिससे कर्मचारी बिना किसी रुकावट के अपने वित्तीय जरूरतों को पूरा कर सकें !