सरकार का कहना है कि नया कदम कर्मचारियों को अपने पैसों तक आसान और लचीली पहुंच प्रदान करेगा, साथ ही यह सुनिश्चित करेगा कि उनके पास रिटायरमेंट के लिए पर्याप्त बचत भी सुरक्षित रहे।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने अपने सदस्यों के लिए नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब पीएफ (PF) और पेंशन की पूरी राशि केवल तभी निकाली जा सकेगी, जब सदस्य क्रमशः 12 महीने और 36 महीने तक बेरोजगार रहें। इसके साथ ही, प्रत्येक सदस्य को अपने खाते में कम से कम 25% राशि बनाए रखना अनिवार्य होगा। इस बदलाव को ईपीएफओ की केंद्रीय न्यासी बोर्ड की बैठक में मंजूरी दी गई, जिसकी अध्यक्षता श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने की।
पहले क्या था नियम
पहले सदस्यों को दो महीने की बेरोजगारी के बाद अपने खाते की पूरी राशि निकालने की अनुमति थी और कोई न्यूनतम बैलेंस रखने की शर्त नहीं थी। लेकिन अब नए नियम के तहत, खाते में कुल राशि का 25% हिस्सा हमेशा सुरक्षित रखा जाएगा, जबकि बाकी 75% रकम सदस्य साल में छह बार तक आंशिक रूप से निकाल सकते हैं।
नई योजना का उद्देश्य
इस बदलाव का मकसद यह है कि कर्मचारियों को जरूरत पड़ने पर पैसों की सुविधा मिले, लेकिन उनका रिटायरमेंट फंड पूरी तरह खत्म न हो। यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि आंकड़ों के अनुसार, करीब 87% सदस्य अपने खाते के सेटलमेंट के समय 1 लाख रुपये से कम राशि के साथ रह जाते हैं।
मिलेगा पेंशन खाते में ट्रांसफर का विकल्प
श्रम मंत्री ने बताया कि अब सदस्य चाहें तो अपनी पीएफ राशि का एक हिस्सा पेंशन खाते में ट्रांसफर भी कर सकते हैं। इससे उन्हें न केवल ब्याज का फायदा मिलेगा, बल्कि लंबी अवधि के लिए बेहतर रिटायरमेंट फंड तैयार करने में भी मदद मिलेगी।
करोड़ों कर्मचारियों को लाभ
श्रम मंत्रालय का अनुमान है कि इस बदलाव से लगभग 30 करोड़ ईपीएफओ सदस्य लाभान्वित होंगे। यह कदम 8.25% वार्षिक ब्याज दर और कंपाउंडिंग के फायदों के साथ एक स्थायी और मजबूत बचत व्यवस्था को बढ़ावा देगा।
कुल मिलाकर, सरकार का यह फैसला कर्मचारियों को वित्तीय लचीलापन तो देता है, लेकिन साथ ही उनके भविष्य को आर्थिक रूप से सुरक्षित रखने की दिशा में भी एक अहम कदम है।
