Gas Cylinder New Rules : घरेलू गैस सिलेंडर को लेकर एक और नया नियम आ गया है। गैस सिलेंडर लेने के लिए अगर इस नियम का पालन नहीं किया तो भविष्य में सिलेंडर के लिए किल्लत झेलनी पड़ सकती है। ग्राहकों के साथ-साथ यह नियम डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए भी है। चलिए जानते हैं इस नियम के बारे में-
हाल ही में गैस सिलेंडर के रेट बढ़ाए गए हैं। साथ में प्री बुकिंग को लेकर भी नया नियम आया है। लॉकिंग डेट के बाद 21 दिन के अंदर दूसरा सिलेंडर नहीं लिया जा सकता है। इसी बीच पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से तेल कंपनियों के लिए एक और बड़ा अपडेट जारी किया गया है, जिसके तहत ग्राहकों पर सीधा असर पड़ेगा।
ओटीपी के बगैर नहीं मिलेगा गैस सिलेंडर
मंत्रालय की ओर से अब गैस वितरण एजेंसी को स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि बिना डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (Delivery Authentication Code) यानी ओटीपी के गैस सिलेंडर ना दिया जाए। अभी ओटीपी वाले गैस सिलेंडर की सीमा 80% रखी है। 80% उपभोक्ताओं के ओटीपी लेना अनिवार्य किया गया है। अगर कंपनी के रिकॉर्ड में 80% ओटीपी नहीं आते हैं तो एजेंटीयों के लिए भी गैस सप्लाई रोकी जा सकती है।
चार अंको का आता है कोड
देश में पेट्रोलियम कंपनियों के लिए करीब 5 साल पहले नई व्यवस्था लागू की गई थी। इसके तहत डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (Delivery Authentication Code) बताना अनिवार्य किया गया था। बुकिंग करने पर उपभोक्ता के फोन में यह चार अंको का कोड आता है, जिसे सिलेंडर लेते वक्त डिस्ट्रीब्यूटर को बताना होता है। जब सिलेंडर उपभोक्ता के पास पहुंचता है तो यह सिस्टम में दर्ज किया जाता है। जिसके बाद वितरण प्रक्रिया को पूरा माना जाता है।
अगर कोई ओटीपी देने में आनाकानी करे तो उसको भविष्य में सिलेंडर लेने में दिक्कत आ सकती है। हालांकि बाद में जब ओटीपी देने में लोगों ने आनाकानी की व ग्रामीण क्षेत्रों में दिक्कत दिखाई दी तो इसको अनिवार्य नहीं किया गया था। परंतु अब कंपनियों के लिए 80% डीएसी को अनिवार्य कर दिया गया है।
एजेंसियों की ही बढ़ जाएगी मुश्किल
मंत्रालय की ओर से साफ कहा गया है कि अगर 80% ओटीपी यानी डीएसी (gas cylinder DAC) नहीं लिए जाते हैं तो एजेंसी संचालक के पास सिलेंडर नहीं पहुंचेंगे। इससे सीधा-सीधा ग्राहकों पर भी असर पड़ेगा। एजेंसी संचालक के गोदाम में सिलेंडर की उपलब्धता अब इसी सिस्टम पर आधारित रहेगी।
असली ग्राहक को ही मिले लाभ
इस व्यवस्था के तहत यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सिलेंडर असली उपभोक्ता के पास ही पहुंचे। इंडियन ऑयल के एक अधिकारी रवि चंदेरिया का कहना है कि वास्तविक उपभोक्ता को लाभ दिलाने के लिए डीएसी सिस्टम बनाया गया है। इसमें सभी को सहयोग करना चाहिए। रसोई गैस की कोई कमी नहीं है।
