Gold Price – साल 2025 में सोने ने निवेशकों को 75% तक का शानदार रिटर्न दिया। एक रिपोर्ट के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय और भारतीय बाजारों में इसकी कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी देखने को मिली। अब 2026 की शुरुआत में सवाल यह है कि क्या सोना पिछले साल जैसी तेजी (gold price hike) दोहराएगा, या इस साल इसकी कीमतों में स्थिरता देखने को मिलेगी… आइए नीचे खबर में जान लेते है कि इस साल के अंत तक सोने की कितनी कीमत देखने को मिल सकती हैं-
साल 2025 में सोना अपनी चमक के दम पर शेयर बाजार और क्रिप्टोकरेंसी (cryptocurrency) जैसी संपत्तियों को पीछे छोड़ गया। देश भर में छाई वैश्विक अनिश्चितता, युद्ध की आशंका और कमजोर होती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सोना सुरक्षित निवेश (gold safe investment) के रूप में तेजी से उभरा। सालभर में सोने की तेज रफ्तार ने बड़े-बड़े दिग्गजों के अनुमानों को ध्वस्त कर दिया।
साल की शुरुआत में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना (gold in international market) करीब 2,638.74 डॉलर प्रति औंस था, जो 29 दिसंबर 2025 तक बढ़कर 4,550.10 डॉलर के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया। भारतीय बाजार में यह तेजी और भी प्रभावशाली रही। MCX पर 24 दिसंबर 2024 को जहां सोना लगभग ₹78,950 था, वहीं साल के अंत तक यह बढ़कर ₹1,38,217 के पार पहुंच गया।
यानी भारतीय निवेशकों को करीब 75% का शानदार (gold return) रिटर्न मिला। अब नए साल की शुरुआत के साथ ही एक बड़ा सवाल सामने है-क्या सोना 2026 में भी पिछले साल की तरह तेजी दिखाएगा, या फिर इसकी रफ्तार धीमी पड़ जाएगी?
आज सोना सिर्फ आभूषण या निवेश का साधन नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे कीमती एसेट बन चुका है। मार्केट कैपिटलाइजेशन (market capitalization) में इसने कई दिग्गज टेक कंपनियों को पीछे छोड़ दिया है। वर्तमान में सोने का कुल मार्केट कैप करीब 30.48 ट्रिलियन डॉलर आंका गया है, जो इसके वैश्विक भरोसे को साबित करता है। सेंट्रल बैंकों की रिकॉर्ड खरीद ने इसे और भी मजबूत बना दिया है।
2026 में रॉकेट बनेगा या थमेगी सोने की रफ्तार?
साल 2026 में सोने की चाल को लेकर विशेषज्ञों की राय मिली-जुली लेकिन सकारात्मक है। वीटी मार्केट्स के ग्लोबल स्ट्रैटेजी ऑपरेशंस लीड रॉस मैक्सवेल का मानना है कि सोना किसी “वन-वे” रफ्तार के बजाय एक तय दायरे में ही कारोबार करेगा। उनके अनुसार, सोने की कीमत 3,900 डॉलर से 5,000 डॉलर प्रति औंस के बीच झूल सकती है, यानी भारतीय रुपये में यह लगभग 1.32 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर पर रह सकता है।
वहीं, Augmont की रिसर्च हेड रेनिशा चैनानी थोड़ी अधिक बुलिश नजर आती हैं। उनका अनुमान है कि सोने की कीमत 4,000 से 5,500 डॉलर प्रति औंस तक जा सकती है। उनका मानना है कि बढ़ता वैश्विक कर्ज (rising global debt) और भू-राजनीतिक तनाव सोने की कीमतों को नीचे नहीं आने देंगे।
ये 5 फैक्टर जो तय करेंगे सोने की चाल-
रॉस मैक्सवेल के मुताबिक, 2026 में सोने की चाल सिर्फ सट्टेबाजी (betting) पर नहीं, बल्कि वैश्विक वित्तीय स्थिरता (global financial stability) पर निर्भर करेगी। मुख्य रूप से ये कारक असर डालेंगे-
ब्याज दरों का चक्र-
अगर ग्लोबल सेंट्रल बैंक (खासकर यूएस फेड) ब्याज दरों में कटौती जारी रखते हैं, तो सोना रखना सस्ता हो जाएगा, जिससे इसकी मांग और बढ़ेगी।
करेंसी पर घटता भरोसा-
भले ही महंगाई कम दिखे, लेकिन अगर लोगों का अपनी करेंसी (like dollar or rupee) से भरोसा कम होता है, तो वे सोने की ओर भागेंगे।
सरकारी कर्ज का संकट-
देश भर की सरकारों पर बढ़ता राजकोषीय घाटा (rising fiscal deficit) फिएट करेंसी की वैल्यू को कम करता है, जहां सोना एक सुरक्षित ‘स्टोर ऑफ वैल्यू’ के रूप में उभरता है।
जियोपॉलिटिकल वॉर-
ट्रेड वॉर और क्षेत्रीय संघर्ष (Like the Middle East or the Ukraine crisis) जब भी बढ़ेंगे, सोने की कीमतें आसमान छुएंगी।
सप्लाई और डिमांड-
नई सोने की खदानों के विकास की धीमी गति और भारत-चीन जैसे देशों में बढ़ती मांग (Increasing demand in countries like India and China) कीमतों को सपोर्ट देती रहेगी।
सेंट्रल बैंकों की नीति तय करेगी सोने की राह-
2026 में सोने की दिशा तय करने वाला सबसे बड़ा कारक सेंट्रल बैंकों की नीति होगी। अगर लिक्विडिटी बढ़ती है और सख्ती कम होती है, तो सोने को मजबूती मिल सकती है। रेनिशा चैनानी का कहना है कि सेंट्रल बैंक (central bank) अब सोने को सिर्फ रिजर्व नहीं, बल्कि एक रणनीतिक हथियार के रूप में देख रहे हैं। जब तक वे खरीदारी जारी रखेंगे, सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट की संभावना कम है। हालांकि, अगर ‘रियल इंटरेस्ट रेट्स’ (Real Interest Rates) उच्च बने रहे, तो सोने की चमक थोड़ी कम हो सकती है।
