Gold Price : पिछले कुछ दिनों से सोने और चांदी की कीमतों में उतार चढ़ाव देखने को मिल रहा था। हाल ही में एक नई रिपोर्ट सामने आई है, जिसने निवेशकों (Gold Investment Tips) के पसीने छूटा दिये हैं। बताया जा रहा है कि अब सोने की कीमतों में गिरावट आने वाली है। इसके बाद सोने की कीमत 1 लाख रुपये से भी नीचे आ जाएगी। खबर के माध्यम से जानिये इस बारे में।
लगातार बढ़ रही सोने और चांदी की कीमतों को देखकर लोग इसमें धड़ाधड़ निवेश कर रहे हैं। ऐसे में अब निवेशकों को तगड़ा झटका लगा है क्योंकि आने वाले दिनों में सोने की कीमतों (Sone ki kemat) में नरमी देखने को मिल रही है। कीमतों में गिरावट का ये दौर आने वाले दिनों में भी बना रहने वाला है। इसके बाद सोने की कीमत 1 लाख से भी नीचे आ सकती है। खबर के माध्यम से जानिये सोने की कीमत।
साल 2025 में निवेशकों को हुआ बंपर फायदा
साल 2025 में निवेशकों को बंपर मुनाफा देना वाला सोना जनवरी 2026 में 1,80,000 रुपये के पार जाकर रिकॉर्ड हाई बना लिया था, हालांकि फरवरी महीने में ये जमीन (Gold Price Forecast) पर आता दिख रहा है। पिछले शुक्रवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने की कीमत 1,56,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हो गई है। इसका मतलब है कि रिकॉर्ड हाई से लगभग 24,500 रुपये नीचे गिर चुका है। इंटरनेशनल मार्केट (Gold Price on COMEX) में भी यही हाल है। यहां सोना अपने शिखर से 10.50 प्रतिशत टूटकर 5,046 डॉलर पर आ गया है।
सोने की कीमतों में गिरावट की उम्मीद-
मार्केट एक्सपर्ट्स का बताना है कि सोने की कीमतों में जो तूफानी तेजी दर्ज की जा रही थी, उस पर अब ब्रेक लग गया है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार रूस एक बार फिर अमेरिका (Gold Price Fall reason) के साथ डॉलर में ट्रेड शुरू करने पर सहमति बना रहा है। पिछले कुछ सालों से रूस और चीन मिलकर डी-डॉलराइजेशन। इसका मतलब है कि डॉलर मुक्त व्यापार की अगुवाई कर रहे थे और सोने का भंडार जमा कर रहे थे।
डॉलर व्यापार को लगा झटका-
हालांकि अब खबर है कि पुतिन प्रशासन सात मुख्य सेक्टरों में अमेरिका के साथ आर्थिक साझेदारी की चाह रहा है। इसमें डॉलर बेस्ड पेमेंट सिस्टम में वापसी सबसे जरूरी बताई जा रही है। उम्मीद लगाई जा रही है कि ये कदम रूस-यूक्रेन वॉर खत्म (Gold Price) करने के किसी सीक्रेट एग्रीमेंट का हिस्सा हो सकता है। अगर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उत्पादक देश (रूस) वापस डॉलर में व्यापार शुरू करता है, तो फिर ये सोने की मांग के लिए बहुत बड़ा झटका बनकर सामने आ सकता है।
थमेगी सेंट्रल बैंकों की खरीदारी-
सोने की कीमतों को आसमान पर पहुंचाने में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। SEBI रजिस्टर्ड एक्सपर्ट अनुज गुप्ता ने बताया है कि जब से डोनाल्ड ट्रंप दोबारा व्हाइट (Gold Price Fall reason) हाउस पहुंचे और टैरिफ पॉलिसी शुरू हुई, तब से देशों ने डॉलर के बजाय सोने को सुरक्षित विकल्प मानकर खरीदी करना शुरू कर दिया था।
सोना बाजार में शुरू हुई बिक्री-
उन्होंने बताया है कि BRICS देशों के बैंक दुनिया का 50 प्रतिशत से ज्यादा सोना खरीद रहे थे, इसकी वजह से बाजार में इसकी कमी हो गई थी और दामों में भी उछाल दर्ज किया जा रहा था। हालांकि अब अगर रूस वापस डॉलर (Gold Price in Dollar) की ओर मुड़ता है, तो न सिर्फ खरीदारी रुकेगी, बल्कि ये बैंक अपना जमा किया हुआ सोना बाजार में बेचना भी शुरू कर सकते हैं। इस स्थिति में बाजार में सोने की सप्लाई बढ़ सकती है और कीमतें तेजी से नीचे गिरेंगी।
इस रेट पर पहुंच सकता है सोना-
PACE 360 के चीफ ग्लोबल स्ट्रैटेजिस्ट ने सोने को लेकर एक बड़ी भविष्यवाणी सामने आ रही है। उन्होंने बताया है कि सोना अपना रिकॉर्ड हाई लेवल देख चुका है। अब इसमें जो भी थोड़ी बहुत तेजी आती है, वो एक डेड कैट बाउंस होगी। उनका मानना है कि 2027 के आखिर तक भारत में सोने की कीमतें 1,00,000 रुपये प्रति 10 ग्राम (10 gram Gold Price) से भी नीचे लुढ़क सकती है। इसके साथ ही में अंतरराष्ट्रीय बाजार में ये 3,000 डॉलर प्रति औंस तक लुढ़क सकता है। उन्होंने सलाह दी है कि अब सोने को सुरक्षित निवेश मानना जोखिम भरा हो सकता है। इसकी जगह लॉन्ग टर्म के सरकारी बॉन्ड सुरक्षित (Gold Price Update) और बेहतर रिटर्न देने वाले साबित हो सकते हैं।
ट्रंप फैक्टर और रूस ने दिखाई नई चाल-
इसके साथ ही में क्रेमलिन के एक इंटरनल मेमो से संकेत मिल रहे हैं कि रूस अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के साथ जीवाश्म ईंधन (fossil fuels), प्राकृतिक गैस और कच्चे माल के क्षेत्र में बड़ी साझेदारी देख रहा है। ट्रंप की पॉलिसी हमेशा से डॉलर को मजबूत करने की रही है। रूस को पता है कि अगर उसे अमेरिकी मार्केट और टेक्नोलॉजी का फायदा उठाना है, तो उसे डॉलर को अपनाना ही होगा।
