Gold Silver Price – सोना-चांदी खरीदारों के लिए जरूरी खबर। दरअसल आपको बता दें कि सोने और चांदी की कीमतों (silver price) में लगातार तेजी देखी जा रही है। जिसके चलते निवेशक सोच रहे हैं कि आखिर क्या इस समय इनकी खरीदारी करना सही रहेगा। ऐसे में विशेषज्ञों की राय क्या है… आइए ये जान लेते है नीचे इस खबर में-
सोने की कीमतों में लगातार तेजी देखी जा रही है। 26 जनवरी को सोना पहली बार 5,000 डॉलर प्रति औंस (28.35 ग्राम) के पार पहुंच गया था। उस समय सोने का भाव करीब 4.57 लाख रुपये प्रति औंस रहा, यानी 10 ग्राम सोने की कीमत (10 gram gold price) लगभग 1.61 लाख रुपये हो गई। इससे साफ है कि पारंपरिक निवेश के तौर पर सोने की मांग अब भी मजबूत बनी हुई है।
सोने में ऐतिहासिक तेजी 2025 में ही देखने को मिल चुकी थी, जब कीमतों में 60 फीसदी से ज्यादा का उछाल आया था। यह 1979 के बाद सोने की सबसे बड़ी सालाना बढ़त (Gold’s biggest annual gain) मानी गई। अब 2026 की शुरुआत में ही, पहले महीने में सोना 17 फीसदी से ज्यादा चढ़ चुका है। शेयर बाजार (share market) में जारी अनिश्चितता के चलते निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की ओर ज्यादा रुख कर रहे हैं, क्योंकि सोना और अन्य कीमती धातुएं सेफ इनवेस्टमेंट (safe investment) मानी जाती हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सोने में यह तेजी कब तक बनी रहेगी (How long will this rise in gold continue?), कीमतों में उछाल के पीछे मुख्य वजहें क्या हैं और क्या मौजूदा समय में सोने में निवेश करना सुरक्षित माना जा सकता है?
सोने की तेजी के पीछे 3 बड़े कारण-
सोने की तेज़ी के पीछे यूं तो कई कारण हैं, लेकिन सब एक दूसरे से जुड़े हुए हैं।
भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने (Rising geopolitical tensions) से दुनिया में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। ऐसे समय में निवेशक जोखिम भरे विकल्पों से बचकर सुरक्षित मानी जाने वाली संपत्तियों, खासकर सोने में निवेश बढ़ा रहे हैं।
जियोपॉलिटिकल तनाव (Geopolitical tensions) के चलते कई देश डॉलर पर निर्भरता कम कर रहे हैं और सोने का भंडार बढ़ा रहे हैं।
एसेट मैनेजमेंट कंपनी स्प्रॉट इंक के अध्यक्ष रेयान मैकइंटायर के मुताबिक, भू-राजनीतिक विवाद (geopolitical dispute) और आर्थिक अनिश्चितता के कारण सोने की कीमतें मजबूत बनी हुई हैं और केंद्रीय बैंक (central bank) लगातार सोना खरीद रहे हैं।
ट्रंप की नीतियां और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव-
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) की नीतियों को लेकर बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। ऐसे माहौल में निवेशक सोना-चांदी जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली कीमती धातुओं की ओर ज्यादा रुख कर रहे हैं। हाल के दिनों में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव का भी असर सोने की कीमतों पर पड़ा है। अमेरिका-वेनेजुएला, ईरान से जुड़े घटनाक्रम और ग्रीनलैंड (greenland) को लेकर दिए गए बयानों जैसी वैश्विक राजनीति से जुड़ी खबरों ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है, जिससे सोने की मांग में तेजी देखी गई है।
ट्रंप ने यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने (Trump imposes tariffs on European countries) की भी धमकी दी थी, हालांकि बाद में वे इस पर पीछे हट गए। इसके बावजूद व्हाइट हाउस से आ रहे ऐसे बयानों के कारण बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। हाल ही में ट्रंप ने कनाडा को चेतावनी दी कि अगर उसने चीन के साथ कोई व्यापार समझौता किया, तो अमेरिका कनाडा से आने वाले सामान पर 100 फीसदी टैरिफ लगाएगा, हालांकि बाद में कनाडा ने साफ किया कि उसका ऐसा कोई इरादा नहीं है। इन घटनाओं से निवेशकों में डर बढ़ा है। आमतौर पर जब दुनिया में युद्ध, हमले या बड़ी राजनीतिक अनिश्चितता होती है, तो निवेशक शेयर बाजार (share market) जैसे जोखिम वाले निवेश से पैसा निकालकर सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों में निवेश करना पसंद करते हैं।
भू-राजनीतिक जोखिम और वैश्विक अनिश्चितता (global uncertainty) के चलते निवेशकों ने सोने की ओर रुख किया, जिससे इसकी मांग बढ़ी और कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला। इसी तरह 2025 में भी जब ट्रंप ने कई देशों पर टैरिफ लगाए थे, तब निवेशक ‘सेफ हेवन’ एसेट्स की तरफ बढ़े थे। बाजार में सेफ हेवन उन संपत्तियों को कहा जाता है, जो बाजार गिरने पर भी अपनी कीमत बनाए रखती हैं या कई बार और बढ़ जाती हैं। सोना और चांदी (silver) ऐसे ही सुरक्षित निवेश माने जाते हैं।
केंद्रीय बैंकों की बढ़ी सोने की खरीद-
सोने की तेजी के पीछे केंद्रीय बैंकों की भारी खरीद एक बड़ी वजह मानी जा रही है। यह ट्रेंड 2022 से लगातार मजबूत होता जा रहा है और 2025 में इसमें और तेजी आई, जिससे सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर (Gold prices hit record levels) तक पहुंच गईं। चीन, पोलैंड, तुर्की, भारत और कजाकिस्तान जैसे कई देश अपने गोल्ड रिजर्व (gold reserve) को बढ़ा रहे हैं और सोने को रिजर्व एसेट के तौर पर मजबूत कर रहे हैं। ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि कई देश अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करना चाहते हैं।
सैंक्शन्स, ट्रेड वॉर और वैश्विक अस्थिरता से बचाव के लिए सोना कई देशों के लिए “इंश्योरेंस” की तरह काम करता है। रूस-यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट में तनाव (tension in the middle east) और ट्रेड वॉर जैसे हालात के चलते केंद्रीय बैंक तेजी से सोना खरीद रहे हैं, ताकि किसी भी आर्थिक झटके के समय उनके रिजर्व सुरक्षित रह सकें।
गोल्डमैन सैक्स के मुताबिक, उभरते हुए देश हर महीने औसतन 60 टन सोना खरीद रहे हैं। पोलैंड के केंद्रीय बैंक के पास 2025 के अंत तक करीब 550 टन सोना था और अब उसका लक्ष्य इसे बढ़ाकर 700 टन करने का है, यह जानकारी इस महीने गवर्नर एडम ग्लापिंस्की (Governor Adam Glapinski) ने दी थी। वहीं, चीन लगातार 14 महीनों से अपने गोल्ड रिजर्व में इजाफा कर रहा है।
केंद्रीय बैंक बड़े पैमाने पर सोना खरीदते हैं और प्राइस‑इंसेंसिटिव होते हैं, यानी कीमतें कितनी भी ऊंची हों, वे खरीदारी जारी रखते हैं। इससे मार्केट में सोने की सप्लाई कम (gold supply low) हो जाती है और कीमतें बढ़ती हैं। जब केंद्रीय बैंक सोना खरीदते हैं, तो प्राइवेट निवेशक, ईटीएफ (ETF) और रिटेल निवेशक भी उनके कदम का अनुसरण करते हैं, जिससे कुल डिमांड और बढ़ जाती है।
डॉलर का घटता इस्तेमाल और सोने की बढ़ती मांग-
अमेरिकी डॉलर कमजोर होने पर सोने की कीमतें आमतौर पर बढ़ जाती हैं। इसका कारण यह है कि सोना अंतरराष्ट्रीय स्तर (gold international level) पर डॉलर में ही खरीदा-बेचा जाता है। डॉलर कमजोर होने पर अन्य देशों के निवेशकों के लिए सोना सस्ता हो जाता है, जिससे उनकी खरीदारी बढ़ जाती है। इससे सोने की मांग बढ़ती है और कीमतों में तेजी आ जाती है।
डॉलर कमजोर होने के पीछे अक्सर महंगाई या आर्थिक अनिश्चितता रहती है। ऐसे समय में निवेशक सोने को सुरक्षित निवेश यानी ‘सेफ हेवन’ मानते हैं और इसकी ओर ज्यादा रुख करते हैं।
साथ ही, डॉलर कमजोर होने के समय अमेरिका में ब्याज दरें भी कम रहती हैं, जिससे सोना रखना निवेशकों के लिए नुकसानदेह नहीं होता। विश्लेषकों के अनुसार, जब निवेशक डॉलर से दूरी बढ़ाते हैं, तभी सोने की कीमत में तेजी देखने को मिलती है।
अमेरिका और जापान ने मिलकर येन को सपोर्ट देने के लिए हस्तक्षेप किया, जिससे डॉलर कमजोर हुआ। डॉलर कमजोर होने पर सोना विदेशी खरीदारों के लिए सस्ता हो जाता है, क्योंकि सोना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर में ही खरीदा-बेचा जाता है। इसके चलते दुनिया भर के निवेशक सोने की ओर ज्यादा रुख कर रहे हैं।
क्या इस साल सोना और महंगा होगा-
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल सोने की कीमत में तेजी (gold price hike) का रुझान बना रह सकता है। अलग-अलग रिपोर्ट्स के मुताबिक 2026 में सोने के दाम कुल मिलाकर ऊंचे स्तर पर बने रहने की संभावना है, हालांकि बीच-बीच में इसमें हल्की गिरावट भी देखने को मिल सकती है।
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (India Bullion and Jewellers Association) के प्रवक्ता सीए सुरिंदर मेहता मीडिया से बातचीत पर कहा कि अगर अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर दबाव (Pressure on the US economy) बढ़ता है, तो निवेशक सुरक्षित निवेश यानी ‘सेफ हेवन’ की ओर ज्यादा रुख करेंगे। ऐसी स्थिति में सोने की मांग बढ़ेगी और इसकी कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिल सकता है।
