केंद्र सरकार वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। इस दिशा में गठित मंत्रिसमूह (जीओएम) जल्द ही अपनी सिफारिशें सौंप सकता है। सूत्रों के अनुसार, जीओएम 12 प्रतिशत और 18 प्रतिशत के टैक्स स्लैब को हटाने का प्रस्ताव रख सकता है। अगर ऐसा होता है, तो कई वस्तुओं पर टैक्स की दरों में बड़ा बदलाव होगा।
कृषि इनपुट पर कर सस्ता होगा

सरकार का लक्ष्य जीएसटी दर संरचना को सरल बनाना और विकास को बढ़ावा देना है। इसी कड़ी में कृषि क्षेत्र को बड़ी राहत दी जा सकती है। वर्तमान में उर्वरक अम्लों पर 18 प्रतिशत और जैव कीटनाशकों पर 12 प्रतिशत जीएसटी लागू है। प्रस्ताव के अनुसार, दोनों पर कर घटाकर 5 प्रतिशत किया जा सकता है। इससे किसानों को बड़ी राहत मिलेगी और कृषि लागत में कमी आएगी।
नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा
सरकार हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सौर और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादों पर जीएसटी दरों में कमी का प्रस्ताव रख सकती है। वर्तमान में, सौर वॉटर हीटर, सोलर कुकर और उनसे जुड़े पुर्जों पर 12 प्रतिशत कर लगता है, जिसे घटाकर 5 प्रतिशत करने की योजना है। वहीं, कोयला, ब्रिकेट और ठोस ईंधन पर जीएसटी 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत किया जा सकता है ताकि राजस्व पर कटौती का प्रभाव संतुलित रहे।
कपड़ा और परिधान उद्योग को राहत
जीएसटी में बदलाव से टेक्सटाइल सेक्टर को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। फिलहाल सिंथेटिक फिलामेंट यार्न, स्टेपल फाइबर यार्न, रबर थ्रेड और कार्पेट पर 12 फीसदी जीएसटी लगता है, जिसे घटाकर 5 फीसदी करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा अपैरल सेक्टर में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अभी 1,000 रुपये तक के कपड़ों पर 5 फीसदी टैक्स लगता है। इस सीमा को बढ़ाकर 2,500 रुपये किया जा सकता है। वहीं, 2,500 रुपये से ऊपर के अपैरल पर जीएसटी की दर 12 से बढ़ाकर 18 फीसदी की जा सकती है।
जूते-चप्पल पर नई दरें लागू होने की संभावना

सरकार जूते-चप्पलों पर भी नई दरें लागू करने की तैयारी कर रही है। फ़िलहाल 2,500 रुपये तक के फुटवियर पर 12 प्रतिशत टैक्स लगता है, जिसे घटाकर 5 प्रतिशत किया जा सकता है। लेकिन, 2,500 रुपये से ज़्यादा कीमत वाले फुटवियर पर जीएसटी 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत किया जा सकता है।
जीएसटी परिषद की महत्वपूर्ण बैठक
इन सभी प्रस्तावों पर अंतिम फैसला 3 और 4 सितंबर को दिल्ली में होने वाली जीएसटी परिषद की बैठक में लिया जाएगा। माना जा रहा है कि केंद्र सरकार सितंबर के अंत तक इन बदलावों को अधिसूचित कर सकती है। अगर ये सुधार लागू होते हैं, तो जीएसटी का ढांचा सरल होगा और अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।