High Court – आमतौर पर प्रोपर्टी से जुड़े नियमों और कानूनों को लेकर लोगों में जानकारी का अभाव हाेता है। इसी कड़ी में आपको बता दें कि संपत्ति और वसीयत से जुड़े एक अहम मामले में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ किया है कि सिर्फ वसीयत के आधार पर पूरी संपत्ति हासिल नहीं की जा सकती… इसके लिए ये काम करना भी अनिवार्य हैं-
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मुस्लिम समुदाय में संपत्ति के बंटवारे और वसीयत से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाया है। अदालत के अनुसार, मुस्लिम समुदाय का कोई भी व्यक्ति मृत्यु के बाद वसीयत (Will) के जरिए अपनी संपत्ति का एक-तिहाई से अधिक हिस्सा कानूनी वारिसों की सहमति के बिना किसी अन्य को नहीं दे सकता।
दरअसल, छत्तीसगढ़ के कोरबा की रहने वाली 64 वर्षीय जैबुन निशा के पति अब्दुल सत्तार का मई 2004 में निधन हो गया था। इसके बाद जैबुन निशा के भतीजे सिकंदर ने खुद को मृतक का गोद लिया हुआ बेटा बताते हुए निचली अदालत में एक कथित वसीयत पेश की। इस कथित वसीयत में अब्दुल सत्तार की पूरी संपत्ति (entire property) भतीजे सिकंदर के नाम दर्ज बताई गई थी।
निचली अदालत ने भतीजे सिकंदर के पक्ष में फैसला दिया था। इसके बाद जैबुन निशा ने कथित वसीयत को फर्जी बताते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (Chattisgarh High court) में इस फैसले को चुनौती दी। इस मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के जज जस्टिस बिभुदत्त गुरु ने की। 2 फरवरी को फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को खारिज (High Court set aside the lower court’s order) कर दिया। कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत एक विधवा के वैधानिक अधिकारों की रक्षा (Protection of the legal rights of widows) करने में असफल रही है।
हाईकोर्ट (Highcourt) के इस फैसले के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अपनी पूरी संपत्ति किसी के नाम वसीयत कर देता है और वसीयतकर्ता की मृत्यु हो जाती है, तो ऐसी स्थिति में कानूनी वारिसों की सहमति जरूरी होगी। वारिसों की सहमति के बिना, वसीयत होने के बावजूद संबंधित व्यक्ति को पूरी संपत्ति नहीं मिल सकती।
