Home Loan – अगर होम लोन की EMI आपकी जेब पर भारी पड़ने लगी है, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय सही कदम उठाना जरूरी है। बहुत से लोग नहीं जानते कि होम लोन की टेन्योर और EMI को अपनी जरूरत के हिसाब से बदला जा सकता है… ऐसे में हम आपको बताएंगे कि इससे जुड़ा सही फैसला कैसे लिया जाए-
होम लोन आमतौर पर 20 से 30 साल की लंबी अवधि के लिए लिया जाता है, लेकिन इतने समय में व्यक्ति की आर्थिक स्थिति और ज़रूरतें बदल सकती हैं। कभी EMI बोझ लगने लगती है, तो कभी कर्ज जल्दी चुकाने की इच्छा होती है। ऐसे में यह सवाल अहम हो जाता है कि क्या होम लोन की टेन्योर बीच में बदली जा सकती है और इससे फायदा होगा या ब्याज का बोझ बढ़ जाएगा।
अच्छी बात यह है कि बैंक आमतौर पर होम लोन की टेन्योर बढ़ाने या घटाने की सुविधा देते हैं, खासकर फ्लोटिंग रेट वाले लोन में। हालांकि, यह फैसला सोच-समझकर लेना जरूरी है, क्योंकि टेन्योर में बदलाव से आपकी EMI और कुल ब्याज लागत दोनों पर सीधा असर पड़ता है।
कैसे बदलती है होम लोन की टेन्योर-
जब आप बैंक से होम लोन की टेन्योर बदलने का अनुरोध करते हैं, तो बैंक बकाया लोन राशि (Outstanding Principal) के आधार पर नया रीपेमेंट शेड्यूल (New repayment schedule) तैयार करता है। इसके लिए आमतौर पर दो विकल्प दिए जाते हैं-
ईएमआई वही रहती है, लेकिन लोन की टेन्योर बदल जाती है।
या अवधि वही रहती है और EMI बढ़ या घट जाती है।
शुरुआती वर्षों में ब्याज का बोझ ज्यादा-
आमतौर पर 20 साल के होम लोन (home loan) में शुरुआती 7 से 10 वर्षों तक EMI का बड़ा हिस्सा ब्याज में चला जाता है और मूलधन धीरे-धीरे घटता है। इसलिए यदि आप शुरुआती वर्षों में टेन्योर में बदलाव करते हैं, तो इसका असर ज्यादा होता है। बाद के वर्षों में टेन्योर बदलने से मिलने वाला फायदा सीमित रह जाता है।
टेन्योर घटाने का फायदा-
अगर आपकी आय (income) बढ़ गई है या कोई अन्य कर्ज खत्म हो चुका है, तो होम लोन की टेन्योर कम करना फायदेमंद साबित हो सकता है। EMI में 10-15% की बढ़ोतरी से लोन अवधि कई साल घटाई जा सकती है। इससे कुल ब्याज में लाखों रुपये की बचत संभव है। उदाहरण के तौर पर, 60 लाख रुपये के बकाया लोन पर 8.5% ब्याज दर के साथ 18 साल शेष हों, तो टेन्योर 3-5 साल घटाने से बड़ा ब्याज लाभ मिल सकता है।
टेन्योर बढ़ाने से क्या होगा-
अगर EMI ज्यादा बोझिल लग रही है, तो होम लोन की टेन्योर बढ़ाकर मासिक किस्त कम की जा सकती है। इससे कुछ समय के लिए राहत मिलती है, लेकिन कुल ब्याज खर्च बढ़ जाता है। यह विकल्प तब ठीक रहता है जब आय पर अस्थायी दबाव हो, जैसे नौकरी में बदलाव, बिजनेस मंदी या स्वास्थ्य से जुड़े खर्च। हालांकि, केवल लाइफस्टाइल (lifestyle) खर्चों के लिए टेन्योर बढ़ाना आगे चलकर महंगा साबित हो सकता है।
ब्याज दर में बदलाव से भी होम लोन की टेन्योर पर पड़ता है असर-
फ्लोटिंग रेट होम लोन (Floating Rate Home Loans) में जब ब्याज दर बढ़ती है, तो कई बैंक EMI बढ़ाने के बजाय लोन की टेन्योर बढ़ा देते हैं। ऐसे में 20 साल का लोन बिना ध्यान दिए 24 साल तक भी खिंच सकता है। इसलिए समय-समय पर अपना अमोर्टाइजेशन शेड्यूल (amortization schedule) जरूर जांचते रहना चाहिए।
प्रीपेमेंट से लोन की टेन्योर घटाना ज्यादा फायदेमंद-
अगर आपके पास अतिरिक्त पैसा उपलब्ध है, तो पार्ट प्रीपेमेंट के साथ लोन की टेन्योर कम करना सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है। इससे मूलधन सीधे घटता है और कुल ब्याज का बोझ भी काफी कम हो जाता है।
टेन्योर बदलने से पहले सोच-समझकर लें फैसला-
होम लोन की टेन्योर (Home Loan Tenure) बीच में बदलना संभव है, लेकिन यह फैसला सोच-समझकर लेना जरूरी है। अगर लक्ष्य जल्दी कर्ज मुक्त होना है, तो टेन्योर घटाना बेहतर विकल्प है। वहीं, EMI का दबाव ज्यादा होने पर अवधि बढ़ाना अस्थायी राहत दे सकता है। होम लोन सिर्फ EMI चुकाने का नहीं, बल्कि लंबे समय की कैश-फ्लो प्लानिंग (Cash-flow planning) का अहम हिस्सा होता है।
