Lok Adalat Challan Rules: अगर आपके पास लंबित ट्रैफिक चालान हैं, तो 10 मई को लगने वाली लोक अदालत में उन्हें कम या माफ करवाने का मौका मिल सकता है. यह अदालत छोटे से लेकर बड़े चालानों की सुनवाई करती है. लेकिन कुछ मामलों में छूट नहीं दी जाती.
कैसे होता है लोक अदालत में चालान माफ या कम?
लोक अदालत में कोर्ट द्वारा समझौते के आधार पर चालान की राशि कम कर दी जाती है या पूरी तरह समाप्त कर दी जाती है. हालांकि यह प्रक्रिया चालान की प्रकृति और गंभीरता पर निर्भर करती है. पूरी छूट नहीं मिलती. बल्कि फाइन में राहत दी जाती है.
किन ट्रैफिक चालानों को मिलती है राहत?
लोक अदालत में साधारण ट्रैफिक नियम उल्लंघन वाले चालानों को माफ या कम किया जा सकता है. इनमें शामिल हैं
- सीट बेल्ट न पहनना
- हेलमेट न लगाना
- रेड लाइट तोड़ना
- गलत पार्किंग
- PUC सर्टिफिकेट न होना
- बिना लाइसेंस ड्राइविंग
- गलत लेन में वाहन चलाना
- स्पीड लिमिट क्रॉस करना
- बिना नंबर प्लेट गाड़ी चलाना
इन मामलों में लोक अदालत नहीं करेगी सुनवाई
कुछ गंभीर प्रकार के ट्रैफिक अपराधों की लोक अदालत में सुनवाई नहीं होती. इन मामलों में आपको पारंपरिक कोर्ट में पेश होना पड़ेगा. ऐसे चालानों में शामिल हैं:
- नशे में गाड़ी चलाना (Drunk Driving)
- हिट एंड रन केस
- लापरवाही से मौत का मामला
- नाबालिग द्वारा वाहन चलाना
- अनधिकृत रेसिंग या स्पीड ट्रायल
- अपराध में वाहन का उपयोग
- दूसरे राज्य में कटा चालान
राज्य के बाहर के चालानों पर नहीं मिलेगी राहत
यदि आपका चालान किसी दूसरे राज्य में कटा है, जैसे नोएडा में चालान कटा है और आप दिल्ली में लोक अदालत में सुनवाई की उम्मीद करते हैं, तो यह संभव नहीं होगा. लोक अदालत सिर्फ उसी क्षेत्र के चालानों की सुनवाई करती है.
ऑनलाइन पंजीकरण के बिना नहीं मिलेगी एंट्री
लोक अदालत में शामिल होने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन जरूरी है. इसके बाद आपको एक टोकन नंबर और अपॉइंटमेंट लेटर प्राप्त होगा. लोक अदालत वाले दिन जरूरी दस्तावेज, अपॉइंटमेंट लेटर और टोकन नंबर साथ लेकर जाना होगा. अदालत में पहुंचने का समय आपके स्लॉट से कम से कम 30 मिनट पहले का रखें.
