LPG gas cylinder – सरकार ने एलपीजी गैस सिलेंडर के लिए नए नियम लागू कर दिए हैं। नए नियमों के तहत ग्राहकों को बेहतर और सुनिश्चित गैस सप्लाई का लाभ मिलेगा। बदलाव का मकसद जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकना है और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए गैस की उपलब्धता आसान बनाना है… इससे जुड़ी पूरी डिटेल जानने के लिए खबर को पूरा पढ़ लें-
मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का असर भारत पर भी दिखाई देने लगा है। देश के कई शहरों में रसोई गैस की किल्लत देखने को मिल रही है और गैस एजेंसियों (gas agencies) के बाहर लंबी-लंबी कतारें लग गई हैं। बुकिंग के 8 से 10 दिन बाद भी सिलेंडर डिलीवर (cylinder deliver) नहीं हो पा रहे हैं। सप्लाई में इस बाधा के कारण मुंबई (mumbai), पुणे, बेंगलुरु, राजस्थान (rajasthan) और अन्य कई इलाकों में होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट बंद होने की नौबत आ रही है।
सरकार ने इस संकट से निपटने के लिए गैस बुकिंग के नियमों में बदलाव (Changes in gas booking rules) कर दिए हैं। देश में गैस की कमी और सप्लाई में दिक्कतों को देखते हुए नया आदेश जारी किया गया है। आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए सरकार ने पूरे देश में ‘एसेंशियल कमोडिटी एक्ट, 1955’ (ECA) लागू कर दिया है।
देश में रसोई गैस संकट, सरकार ने लागू किया ECA –
ईरान में युद्ध के चलते भारत में गैस सप्लाई पर संकट (India’s gas supply crisis) गहराता जा रहा है। भारत एलपीजी गैस के लिए आयात पर निर्भर है, और कतर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), अमेरिका, सऊदी अरब और ओमान जैसे देशों से गैस आती है, जो इस समय मिडिल ईस्ट के संघर्ष (Middle East conflicts) की चपेट में हैं। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पाबंदी लगा दी है, जिससे सप्लाई चेन प्रभावित हो गया। इस संकट से निपटने के लिए सरकार ने पिछले 24 घंटों में ताबड़तोड़ कदम उठाए हैं, जिसमें गैस सिलेंडर की बुकिंग नियमों में बदलाव और ECA लागू करना शामिल है।
जानें क्या है ECA और क्या होगा इसका असर-
सरकार ने मौजूदा गैस संकट को देखते हुए ECA लागू करने का निर्णय लिया है। आवश्यक वस्तु कानून (Essential Commodity Act) के तहत सरकार ने गैस कंपनियों को आदेश दिया है कि वे प्राथमिकता के आधार पर गैस की सप्लाई (gas supply) सुनिश्चित करें। इस कानून के तहत सरकार को अधिकार मिलता है कि वह किसी भी जरूरी वस्तु की सप्लाई (supply of goods) और कीमत को नियंत्रित कर सके, और खासकर जमाखोरी जैसी गतिविधियों को रोक सके।
जब भी सप्लाई बाधित होती है या कीमतें बढ़ने लगती हैं, तब इस कानून का उपयोग किया जाता है। इस कानून के तहत घरेलू उपभोक्ताओं, CNG-PNG और इमरजेंसी सेवाओं को प्राथमिकता दी जाती है, जबकि होटल, रेस्टोरेंट (restaurant) और उद्योगों को सीमित गैस आपूर्ति की जाएगी। सरकार आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 के तहत इमरजेंसी परिस्थितियों में सप्लाई और वितरण को नियंत्रित कर स्थिति को संतुलित करने की कोशिश करती है।
गैस सप्लाई को चार श्रेणियों में बांटा गया-
एसेंशियल कमोडिटी एक्ट (Essential Commodity Act) के तहत गैस की आपूर्ति और वितरण को चार कैटेगरीज में बांटा गया है। पहली कैटेगरी में घरेलू उपयोग के रसोई गैस सिलेंडर, PNG और वाहनों में इस्तेमाल होने वाली CNG शामिल हैं, जिन्हें पूरी सप्लाई मिलेगी। दूसरी कैटेगरी में उर्वरक बनाने वाली फैक्ट्रियां आती हैं, जिन्हें 70% गैस उपलब्ध कराई जाएगी। तीसरी कैटेगरी में नेशनल ग्रिड (National Grid) से जुड़ी चाय फैक्ट्रियां और बड़े उद्योग शामिल हैं, जबकि चौथी कैटेगरी में छोटे कारखाने, होटल और रेस्टोरेंट आते हैं।
एलपीजी सिलेंडर बुकिंग के नियमों में बदलाव-
सरकार ने गैस सिलेंडर की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए एलपीजी सिलेंडर बुकिंग के नियम बदल दिए हैं। रसोई गैस सिलेंडर की बुकिंग की समयसीमा 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दी गई है। इसके अलावा, तेल कंपनियों और रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन (LPG Production) बढ़ाने का आदेश दिया गया है, ताकि घरेलू एलपीजी गैस की सप्लाई निरंतर बनी रहे।
बढ़ाए गैस सिलेंडर के दाम-
सरकार ने मौजूदा गैस संकट को देखते हुए गैस सिलेंडर के दाम बढ़ाने का फैसला किया है। अप्रैल 2025 के बाद यह पहली बार है जब घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमतें बढ़ाईं गईं। 14.2 किलो वाले सिलेंडर के दाम 60 रुपये बढ़ा दिए गए हैं। इसके अलावा, 7 मार्च से 19 किलो वाले कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमत में 115 रुपये का इजाफा किया गया था।
OTP और बायोमेट्रिक जरूरी-
गैस की जमाखोरी रोकने (Preventing gas hoarding) के लिए अब OTP या बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है। बिना OTP के डिलीवरी एजेंट गैस सिलेंडर वितरित नहीं कर पाएंगे। सरकार ने तीन प्रमुख तेल कंपनियों के साथ मिलकर एक हाई-लेवल कमेटी बनाई है, जो स्थिति की निगरानी करेगी और रेस्टोरेंट, होटल और अन्य उद्योगों को गैस की सप्लाई की समीक्षा करेगी।
देश में कितने उपभोक्ता, कब सुधरेंगे हालात-
भारत अपनी गैस की जरूरत का अधिकांश हिस्सा आयात से पूरा करता है। देश में 33.2 करोड़ गैस उपभोक्ता हैं और कुल खपत 33.15 मीट्रिक टन है। सरकार ने जनता से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और पैनिक परचेज से बचें, लेकिन हालात को लेकर लोगों में अभी भी चिंता देखी जा रही है।
