Minimum Balance Rule: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों को निर्देश दिया है कि वे न्यूनतम बैलेंस को लेकर ग्राहकों को स्पष्ट जानकारी दें. अगर कोई खाता धारक निर्धारित राशि से कम बैलेंस रखता है, तो बैंक को पहले नोटिस देना होगा और फिर वास्तविक लागत के आधार पर ही पेनल्टी वसूलनी होगी.
न्यूनतम बैलेंस क्या होता है?
न्यूनतम बैलेंस वह न्यूनतम राशि है, जो बैंक खाताधारकों को हर समय अपने अकाउंट में बनाए रखनी होती है. यदि इससे कम राशि होती है, तो बैंक ग्राहकों से पेनल्टी के रूप में अतिरिक्त शुल्क वसूल सकते हैं.
- स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) – राहत देने वाला फैसला
- न्यूनतम बैलेंस: अधिकांश सेविंग अकाउंट्स पर न्यूनतम बैलेंस की आवश्यकता हटा दी गई है.
- पेनल्टी: किसी भी प्रकार की पेनल्टी नहीं लगती.
- यह फैसला छात्रों और कम आय वर्ग के लिए बड़ा राहतभरा कदम माना गया है.
HDFC बैंक – क्षेत्र के हिसाब से अलग-अलग बैलेंस रूल
मेट्रो/शहरी क्षेत्र: ₹10,000
- अर्ध-शहरी क्षेत्र: ₹5,000
- ग्रामीण क्षेत्र: ₹2,500
- पेनल्टी: अधिकतम ₹600 या शॉर्टफॉल का 6% (जो भी कम हो)
- ग्राहकों को समय पर अलर्ट भेजना HDFC की नई नीति का हिस्सा है.
ICICI बैंक – 3 जोन में अलग-अलग न्यूनतम बैलेंस
ग्रामीण क्षेत्र: ₹1,000
अर्ध-शहरी क्षेत्र: ₹5,000
मेट्रो/शहरी क्षेत्र: ₹10,000
पेनल्टी: ₹100 + शॉर्टफॉल का 5%
ICICI बैंक पेनल्टी को स्वचालित रूप से डेबिट करता है.
पंजाब नेशनल बैंक (PNB) – सबसे कम न्यूनतम बैलेंस
ग्रामीण क्षेत्र: ₹400
अर्ध-शहरी क्षेत्र: ₹500
शहरी/मेट्रो क्षेत्र: ₹600
पेनल्टी: ₹400 से ₹600 तक (क्षेत्र के अनुसार)
PNB का नियम अन्य बैंकों की तुलना में ग्रामीण ग्राहकों के लिए सरल है.
क्या होता है अगर न्यूनतम बैलेंस नहीं रखा जाए?
अगर ग्राहक अपने अकाउंट में तय सीमा से कम राशि रखते हैं तो बैंक पेनल्टी लगाता है. हालांकि अब RBI के आदेश के अनुसार, बिना सूचना दिए सीधी पेनल्टी नहीं लगाई जा सकती. इससे ग्राहकों को सुधार का समय मिलेगा.
ग्राहक क्या करें?
अपने बैंक के नियम समझें: हर बैंक के मिनिमम बैलेंस और पेनल्टी अलग होते हैं, इन्हें जानना जरूरी है.
ऑटोमैटिक फंड ट्रांसफर सेट करें: ताकि बैलेंस कभी न घटे.
Zero Balance Account चुनें: अगर नियमित बैलेंस बनाए रखना मुश्किल है तो यह अच्छा विकल्प है.