हिन्दू धर्म में एकादशी व्रत का खास महत्व होता है एक साल में 24 एकादशी के व्रत पड़ते है हालाँकि मलमास लगने के कारण ये साल में 26 भी हो जाती है। मलमास 3 साल से लगता है सभी एकादशी का अपना अपना अलग महत्व होता है इनमें से पापमोचनी एकादशी भी एक है जो हर तरह के पापों से मुक्ति दिलाती है। इस बार यह व्रत शुक्रवार के दिन पड़ रहा है हालाँकि ये व्रत चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में होता है इस दिन भगवान विष्णु का सहस्त्र नाम का पाठ और पूजा अर्चना करे। इसके साथ ही पूर्वजों के लिए मोक्ष प्राप्ति की कामना भी कर सकते है।
एकादशी व्रत का सही समय
हिन्दू पंचांग के मुताबिक, 5 अप्रैल 2024 शुक्रवार के दिन सुबह 9:35 तक पापमोचनी व्रत रहेगा। पापमोचनी एकादशी का व्रत 4 अप्रैल गुरूवार को शुरू होकर 5 अप्रैल शुक्रवार को 9:35 पर समाप्त हो जाएगा। ऐसे में लोग पापमोचनी एकादशी का व्रत शुक्रवार के दिन रख सकते है और इस व्रत का समापन शनिवार 6 अप्रैल को सुबह 7:15 से पहले करना होगा। यदि आप भी इस व्रत को करने के बारे में सोच रहे है तो आप मीठे फल का सेवन कर सकते है।
पापमोचनी एकादशी व्रत की कथा
पापमोचनी एकादशी व्रत की कथा में मंजुघोष नाम की अप्सरा और महर्षि मेधावी नाम के महर्षि की कहानी है पापमोचनी एकादशी दोनों का गलत कर्म के परिणाम से पिशाच कुल में जन्म होने के बाद अप्सरा और महर्षि को काफी यातनाएं झेलनी होती है तब जाकर उन्हें महर्षि पापमोचनी एकादशी का व्रत करने की सलाह देते है। दोनों ने विधि विधान के साथ में यह एकादशी का व्रत रखा और उन्हें भगवान विष्णु ने उस कुल के योनि से मुक्त कर दिया। और वह फिर से पूर्ण रूप से आकर पृथ्वी पर रहने लगे उस दिन से ही पापमोचनी एकादशी का व्रत रखा जाता है।
इस व्रत को रखने से मिलती है पापों से मुक्ति
जैसे कि हम इंसानो से अक्सर छोटी बड़ी गलतियां होती रहती है जैसे की बचने बचाने के लिए झूठ, सड़क पर चलते जाने अनजाने में कई जीव जंतु कीड़े मकोड़े पैर के नीचे आने से मर जाना इन सभी को पापों में गिना जाता है। वहीं, इन सभी और अन्य कई पापों से मुक्ति पाने के लिए पापमोचनी एकादशी का व्रत करना अति आवश्यक होता है। इस व्रत को करने से भगवान विष्णु की उन पर कृपा सदा बनी रहती है। अपने भक्त की खुशियों के लिए भगवान मोक्ष का द्वार खोल देते हैं।
