Poultry Farming: वनश्री नस्ल की मुर्गी आजकल मुर्गी पालन करने वालों के बीच काफी प्रचलित हो रही है. यह नस्ल न केवल अंडे का बेहतर उत्पादन करती है बल्कि इसका मांस भी बाजार में अच्छी कीमत पर बिकता है. एक वनश्री मुर्गी सालाना लगभग 170 अंडे दे सकती है जिससे मुर्गी पालकों को अच्छा मुनाफा होता है.
मुर्गी पालन में वनश्री नस्ल की विशेषताएं
वनश्री नस्ल विशेष रूप से उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो मुर्गी पालन के क्षेत्र में नए हैं. इस नस्ल की मुर्गी पालना बहुत ही आसान है क्योंकि ये बीमारियों के प्रति अधिक प्रतिरोधी होती हैं और कम देखभाल में भी अच्छा प्रदर्शन करती हैं (Ease of Farming and Disease Resistance). इसके अलावा, इसके मांस और अंडों की मांग बाजार में हमेशा बनी रहती है.
वनश्री नस्ल की उत्पत्ति और विकास
वनश्री नस्ल का विकास आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में किया गया है. यह नस्ल असील और एक विदेशी नस्ल के मुर्गों को पार करके विकसित की गई है. इसका रंग पीला भूरा होता है और यह बहुत ही आक्रमक और फुर्तीली होती है, जो अपनी सुरक्षा स्वयं कर सकती है.
वनश्री नस्ल
वनश्री नस्ल की मुर्गियों को पालने का खर्च अपेक्षाकृत कम होता है और यह छोटे पैमाने पर मुर्गी पालन करने वालों के लिए भी सुलभ है. इस नस्ल की मुर्गियों के अंडे बाजार में 8 रुपए प्रति अंडा के हिसाब से बेचे जाते हैं, जिससे पालकों को उचित मुनाफा होता है और उनकी आय में स्थिरता आती है.