Railway News : पिछले 50 सालों से लोग यहां ट्रेन का इंतजार कर रहे हैं। इस दौरान न तो राज्य में कोई रेलवे लाइन बिछाई गई और न ही कोई स्टेशन बनाया गया। ऊंचे पहाड़ों, घनी घाटियों और बदलते मौसम ने इसे रेल नेटवर्क से दूर रखा है, लेकिन अब यह इंतजार खत्म होने वाला है… आइए नीचे खबर में जान लेते है इसके बारे में विस्तार से-
भारत के लगभग हर हिस्से में रेल नेटवर्क मौजूद है और ट्रेन की आवाज सुनाई देती है, लेकिन एक राज्य ऐसा भी है जो आज तक इस मामले में सबसे अनोखा बना हुआ है। यह भारत का इकलौता राज्य है, जहां अब तक न तो कोई रेलवे स्टेशन है और न ही रेल की पटरी बिछाई गई है।
देश का इकलौता राज्य जहां आज तक रेल नहीं पहुंची-
भारत में रेलवे (Indian Railway) को जीवनरेखा कहा जाता है, लेकिन इसके बावजूद एक राज्य ऐसा भी है जहां आज तक न तो कोई रेलवे स्टेशन बना है और न ही ट्रेन की पटरी बिछ पाई है। यहां हम बात कर रहे हैं कुदरत की गोद में बसे खूबसूरत राज्य सिक्किम की, जो आज भी रेल नेटवर्क से पूरी तरह दूर है।
यहां पहली बार कब सुनाई देगी ट्रेन की सीटी?
सिक्किम भारत का इकलौता ऐसा राज्य है, जहां की वादियों में झरनों और पक्षियों की मधुर आवाज़ तो सुनाई देती है, लेकिन ट्रेन की गूंज आज भी लोगों के लिए सिर्फ एक सपना बनी हुई है। सवाल यही है कि आखिर यह राज्य अब तक रेल नेटवर्क से क्यों दूर रहा और कब यहां पहली बार ट्रेन की सीटी सुनाई देगी।
सिक्किम में ट्रेन न होने का कारण-
सिक्किम 1975 में भारत का 22वां राज्य बना था। इसके बाद से करीब 50 साल बीत चुके हैं, लेकिन आज तक यहां रेल नेटवर्क (why sikkim has no railway line) नहीं पहुंच सका। इसका सबसे बड़ा कारण यहां की भौगोलिक स्थिति है।
कठिन रास्ते, मौसम की मार-
सिक्किम ऊंचे पहाड़ों, गहरी खाइयों और तीखी ढलानों से घिरा हुआ है। यहां की मिट्टी और चट्टानें इतनी संवेदनशील हैं कि रेल पटरी बिछाना इंजीनियरों के लिए हमेशा बड़ी चुनौती रहा है। इसके अलावा मौसम भी तेजी से बदलता है। भारी बारिश और बार-बार होने वाले भूस्खलन के कारण बड़े निर्माण कार्य (Major construction work due to landslides) यहां काफी जोखिम भरे साबित होते हैं।
कब खत्म होगा ये इंतजार-
अच्छी खबर यह है कि अब सिक्किम में रेल का यह लंबा इंतजार खत्म होने वाला है। पश्चिम बंगाल के सेवक से सिक्किम के रंगपो तक रेल लाइन बिछाने का काम तेजी से चल रहा है। उम्मीद की जा रही है कि यह प्रोजेक्ट 2027 तक पूरा हो जाएगा, जिसके बाद सिक्किम को अपना पहला रेलवे स्टेशन (Sikkim gets its first railway station) और रेल कनेक्टिविटी मिल सकेगी।
फिलहाल सिक्किम पहुंचने के क्या हैं विकल्प?
फिलहाल सिक्किम जाने के लिए आपको मल्टी-मोडल यात्रा (Multi-modal travel) करनी होती है। सबसे पहले ट्रेन से आपको पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी या न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन तक पहुंचना होगा। इसके बाद वहां से टैक्सी या बस लेकर लगभग 4-5 घंटे का पहाड़ी सफर तय कर आप सिक्किम पहुंच सकते हैं।
हवाई मार्ग और सड़क मार्ग से-
सिक्किम पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी एयरपोर्ट पश्चिम बंगाल का बागडोगरा (Nearest airport is Bagdogra, West Bengal) है, जो गंगटोक से लगभग 125 किलोमीटर दूर है। सिक्किम का अपना पाक्योंग एयरपोर्ट भी है, लेकिन खराब मौसम के कारण वहां उड़ानें अक्सर प्रभावित रहती हैं। इसके अलावा सिलीगुड़ी और दार्जिलिंग से सड़क मार्ग (Road from Siliguri and Darjeeling) बहुत अच्छी है। तीस्ता नदी के किनारे-किनारे घुमावदार रास्तों पर यात्रा करना अपने आप में एक रोमांचक अनुभव होता है।
बिना ट्रेन के भी सैलानियों की पहली पसंद-
ट्रेन की कमी के बावजूद सिक्किम का पर्यटन काफी लोकप्रिय है। हर साल लाखों सैलानी यहां की खूबसूरती और सादगी देखने आते हैं। भारत-चीन सीमा (India-China border) पर स्थित नाथू ला पास अपनी कड़क ठंड के लिए मशहूर है। रुमटेक मोनैस्ट्री की शांति और बौद्ध संस्कृति मन को मोह लेती है, जबकि युमथंग वैली, जिसे फूलों की घाटी कहा जाता है, स्विट्जरलैंड (switzerland) जैसी खूबसूरती पेश करती है।
शांति का अहसास-
कभी-कभी शोर-शराबे और रेल की पटरियों (railway tracks) से दूर होना ही किसी जगह की खासियत बना देता है, और सिक्किम कुछ ऐसा ही है। यहां की कच्ची राहों और शांत वादियों में जो सुकून मिलता है, वह शायद ही किसी बड़े शहर के रेलवे स्टेशन (railway station) पर अनुभव किया जा सके। लेकिन 2027 के बाद, जब सिक्किम में ट्रेन पहुंचेगी (Train will reach Sikkim), यह राज्य आर्थिक और सामाजिक रूप से देश के बाकी हिस्सों से और भी मजबूती से जुड़ जाएगा।
